केरल

थेनमाला में वन्यजीवों का आतंक, हाथी-भालू से दहशत

Kavita2
26 July 2026 3:17 PM IST
थेनमाला में वन्यजीवों का आतंक, हाथी-भालू से दहशत
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थेनमाला : केरल के थेनमाला क्षेत्र के कई रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों की लगातार बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले छह महीनों से हाथी, तेंदुए और भालू आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है। वन विभाग की ओर से सुरक्षा के लिए लगाई गई सोलर फेंसिंग भी वन्यजीवों की घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है।

जानकारी के अनुसार, मुथा लमाडा, इलावनचेरी और कोल्लानगोड पंचायतों के अंतर्गत आने वाले थेनमाला के कई रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों की गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही हैं। हाथियों के झुंड खेतों और बस्तियों तक पहुंच रहे हैं, जबकि तेंदुए और भालू भी कई बार आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों को घरों से बाहर निकलने, खेतों में जाने और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। खासकर रात और सुबह के समय भालुओं की मौजूदगी लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है।

वन विभाग ने जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों में आने से रोकने के लिए कई जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़ (सोलर फेंसिंग) लगाई है। इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार हाथी कई बार इन बाड़ों को तोड़ देते हैं और फिर से बस्तियों और खेतों में प्रवेश कर जाते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई बार रात के समय हाथियों के आने की वजह से लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरते हैं।

इलाके में भालुओं और जंगली सुअरों की मौजूदगी भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में भी इन जानवरों की गतिविधियां देखी गई हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि भालू अक्सर रात या सुबह-सुबह रिहायशी इलाकों में घूमते हैं। इसका सीधा असर डेयरी किसानों पर पड़ा है। कई दूध विक्रेता और किसान समय पर दूध पहुंचाने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, क्योंकि रास्तों में जंगली जानवरों के मिलने का खतरा बना रहता है।

दूध लेने आने वाले ग्राहकों को भी इन इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों की लगातार मौजूदगी के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल सोलर फेंसिंग लगाने से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ नियमित निगरानी की जरूरत है, ताकि वन्यजीवों को आबादी वाले क्षेत्रों में आने से रोका जा सके।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के आसपास मानव गतिविधियों के बढ़ने और प्राकृतिक आवास में बदलाव के कारण कई क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में वन्यजीवों की सुरक्षा और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के सामने अब चुनौती यह है कि वे क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराएं और साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करें।

ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए, खराब पड़ी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए।

फिलहाल थेनमाला क्षेत्र के लोग हाथी, तेंदुए और भालुओं की आवाजाही से परेशान हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही ठोस कदम उठाएगा, जिससे उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके और क्षेत्र में सामान्य जनजीवन फिर से पटरी पर लौट सके।

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