केरल
भ्रष्टाचार के आरोपों पर केरल में संग्राम BJP ने उठाए बड़े सवाल
Ratna Netam
23 Oct 2026 3:31 PM IST

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कन्नूर। केरल की राजनीति में कथित भ्रष्टाचार और हवाला मामलों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य पी.के. कृष्णदास ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन की सरकार कथित 'मासाप्पाडी' यानी मासिक भुगतान और हवाला मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को बचाने का प्रयास कर रही है।कन्नूर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृष्णदास ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में एक-दूसरे के हितों की रक्षा कर रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का हवाला देते हुए दोनों दलों के बीच कथित राजनीतिक समझौते पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
कृष्णदास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने कांग्रेस और सीपीआई(एम) के बीच कथित मिलीभगत को उजागर कर दिया है।उनके अनुसार, दोनों दल सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे का विरोध करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में उनका रुख समान दिखाई देता है।बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन और सीपीआई(एम) के बीच ऐसी राजनीतिक समझ बनी हुई है, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को कानूनी कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।हालांकि, कृष्णदास के इन आरोपों को किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में एक जैसे तर्क देने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृष्णदास ने दावा किया कि केरल सरकार और पिनाराई विजयन ने हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में समान कानूनी तर्क प्रस्तुत किए।उन्होंने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री के मामले में राज्य सरकार का रुख अलग क्यों नहीं दिखाई देता।कृष्णदास ने इसे जनता के जनादेश का अपमान बताते हुए कहा कि सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।बीजेपी नेता के मुताबिक, राज्य की जनता ने सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
क्या है सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला?
यह विवाद कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन से संबंधित है।जांच एजेंसियों का आरोप है कि सीएमआरएल ने पिनाराई विजयन की बेटी वीणा से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को परामर्श सेवाओं के नाम पर लगभग 3.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।इस मामले में पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, विजयन और उनके परिवार ने भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर लगाई सात दिन की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 को कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में पिनाराई विजयन और उनके परिवार से संबंधित सतर्कता जांच पर सात दिनों की अंतरिम रोक लगा दी थी।अदालत ने यह राहत इसलिए दी, ताकि संबंधित पक्ष केरल हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपनी अपील रख सकें।महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द नहीं किया है। जांच पर लगाई गई रोक अंतरिम है और इसे आरोपों से पूरी तरह मुक्त किए जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
UDF सरकार ने किया अपने फैसले का बचाव
दूसरी ओर, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर राज्य सरकार के रुख का बचाव किया है।उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले में जल्दबाजी करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का निर्णय लिया था।उनके अनुसार, एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया अपनाने का सरकार का फैसला कानूनी दृष्टि से उचित था।चेन्निथला ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द नहीं की है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गरमाई केरल की राजनीति
केरल में कथित मासिक भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सत्तारूढ़ UDF, विपक्षी सीपीआई(एम) और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई हैबीजेपी लगातार मांग कर रही है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण न मिले।वहीं, सीपीआई(एम) ने विजयन के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। राज्य सरकार का कहना है कि उसने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कदम उठाए हैं।फिलहाल मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोपों की वास्तविक स्थिति और संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी अदालतों तथा जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
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