
Kerala केरल: राज्य में UDF सरकार की नई लोकप्रिय नीतियों के लागू होने के साथ ही बस परिवहन क्षेत्र में बड़ा असर देखने को मिल रहा है। खासकर KSRTC बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा के बाद निजी बस ऑपरेटरों ने अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई है। इसके साथ ही डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
निजी बस मालिकों का कहना है कि पहले से ही बढ़ती लागत और कम होती आय के बीच यह नई नीति उनके व्यवसाय पर भारी दबाव डाल रही है। उनका तर्क है कि निजी बसों में लगभग 65 प्रतिशत यात्री महिलाएं होती हैं, और यदि वे मुफ्त में सरकारी बसों की ओर आकर्षित होती हैं, तो निजी बसों की आय में बड़ा नुकसान होगा।
बस ऑपरेटरों के अनुसार, महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा योजना लागू होने के बाद कई परिवार, खासकर जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों यात्रा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से KSRTC की ओर रुख कर सकते हैं। इससे निजी बसों में यात्रियों की संख्या में गिरावट आने की आशंका है।
निजी बस यूनियनों का यह भी कहना है कि इस नीति का असर केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे यात्री प्रवाह में बदलाव आएगा। उनका दावा है कि धीरे-धीरे निजी बस सेवाएं केवल छात्रों और सीमित मार्गों तक सिमट सकती हैं, जिससे उद्योग का दायरा घट सकता है।
कुछ ऑपरेटरों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही तो निजी बस परिवहन प्रणाली गंभीर संकट में आ सकती है। उनका कहना है कि इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में असंतुलन पैदा होगा और लंबे समय में यह क्षेत्र कमजोर हो सकता है।
हालांकि सरकार की ओर से इस नीति को सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। लेकिन निजी बस उद्योग के प्रतिनिधि इस नीति के आर्थिक प्रभाव को लेकर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल, परिवहन क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में सरकार और बस ऑपरेटरों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।





