
केरल। मुवाट्टुपुझा POCSO स्पेशल कोर्ट ने छह साल की बच्ची के साथ यौन शोषण के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों को 58-58 साल के कठोर कारावास और 3.75-3.75 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी है।
अदालत का यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में सख्त रुख को दर्शाता है। कोर्ट ने दोषियों को पीड़ित बच्ची के साथ किए गए अपराध को गंभीर मानते हुए कठोर दंड सुनाया।
मामले में दोषी पाए गए आरोपियों की पहचान समल (32) और सूर्यदेव (27) के रूप में हुई है। दोनों को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था। समल को त्रिशूर के ओल्लुरकारा, इल्लान्हिकुलम, कडालीकट्टू स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया था, जबकि सूर्यदेव को थोडुपुझा के उडुंबन्नूर, पलक्कम्मूरी, करयिल, इलांथनम स्थित उसके घर से पकड़ा गया था।
अदालत ने दोनों आरोपियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, प्रत्येक दोषी को 3.75 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा, उन्हें 2-2 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
यह मामला मुवाट्टुपुझा पुलिस स्टेशन में 16 दिसंबर 2019 को दर्ज किया गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपियों के खिलाफ अदालत में रिपोर्ट पेश की।
मामले की जांच मुवाट्टुपुझा के DySP के. अनिलकुमार की निगरानी में की गई। जांच टीम में पूर्व सब इंस्पेक्टर सी.के. बशीर, टी.एम. सूफी, सीनियर महिला सिविल पुलिस अधिकारी पी.एम. लैलानी, एम.के. सजना और ओ.एच. रैहनाथ सहित अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद मामला POCSO स्पेशल कोर्ट में पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
POCSO यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाला कानून नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में विशेष प्रावधान करता है। इस कानून के तहत ऐसे अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया गया है, ताकि मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।
अदालत ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी। बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को समाज के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है और ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर सख्त रुख अपनाती हैं।
इस मामले में पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी माना। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, POCSO मामलों में समय पर जांच और प्रभावी अभियोजन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में मजबूत साक्ष्य और बेहतर जांच से दोषियों को सजा दिलाने में मदद मिलती है।
मुवाट्टुपुझा POCSO स्पेशल कोर्ट का यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद दोनों दोषियों को सजा भुगतनी होगी। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने मामले की कार्रवाई में शामिल सभी टीम सदस्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है।





