
वायनाड (केरल): केरल के वायनाड जिले के कल्लादाई इलाके में हुए हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद अब भी पांच लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए विभिन्न एजेंसियां जुटी हुई हैं। वहीं, राज्य सरकार ने टनल रोड प्रोजेक्ट का काम फिलहाल रोकने का फैसला लिया है और इसकी टेक्नो-लीगल स्टडी कराने का निर्णय किया है।
सरकार का कहना है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सभी जरूरी नियमों और विशेषज्ञ समिति की शर्तों का पालन किया गया था या नहीं।
चार जोन में बांटकर चल रहा सर्च ऑपरेशन
लापता लोगों की तलाश के लिए पूरे प्रभावित इलाके को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
रेस्क्यू टीमों की ओर से मलबे और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
सड़क को दोबारा बनाया गया चलने योग्य
हादसे से प्रभावित मेप्पाडी-चूरलमाला रोड पर भी काम किया गया है। मलबा हटाकर सड़क को दोबारा वाहनों की आवाजाही के लिए तैयार कर दिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव कार्यों को आसान बनाने के लिए संपर्क मार्गों को जल्द से जल्द बहाल करना प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री करेंगे घटनास्थल का दौरा
राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन बुधवार दोपहर तक घटनास्थल का दौरा करेंगे और राहत कार्यों की समीक्षा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
टनल रोड प्रोजेक्ट की होगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार टनल रोड प्रोजेक्ट की टेक्नो-लीगल स्टडी कराएगी। इसके अलावा मौजूदा हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच भी की जाएगी।
जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कंपनी ने प्रोजेक्ट को मंजूरी देते समय विशेषज्ञ अप्रेजल कमेटी की ओर से तय शर्तों का पालन किया था या नहीं।
सरकार यह भी जांच करेगी कि निर्माण प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता को लेकर उठे सवाल
मुख्यमंत्री सतीशन ने टनल रोड प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार के कार्यकाल में विशेषज्ञ अप्रेजल कमेटी पर दबाव था।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में विशेषज्ञ समिति ने क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से इनकार किया था। लेकिन बाद में इसे मंजूरी मिल गई।
सतीशन ने दावा किया कि उन्होंने पहले भी इस तरह के संवेदनशील इलाके में टनल निर्माण को लेकर चेतावनी दी थी। उनके अनुसार, उस समय उनके रुख की आलोचना भी हुई थी और उनका मजाक बनाया गया था।
हादसे के बाद सुरक्षा मानकों पर चर्चा तेज
वायनाड जैसे पहाड़ी और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से पहले भूगर्भीय स्थिति, पर्यावरणीय प्रभाव और सुरक्षा मानकों का गहन अध्ययन जरूरी है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राहत कार्य जारी
फिलहाल बचाव टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि सर्च ऑपरेशन में किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ी जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में राहत और पुनर्वास कार्य भी जारी हैं।
हादसे के बाद सरकार का पूरा ध्यान लापता लोगों को खोजने, प्रभावित परिवारों को सहायता देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने पर है।





