केरल

आदिवासी महिलाओं ने संभाली धान रोपाई

Kavita2
30 Aug 2026 3:22 PM IST
आदिवासी महिलाओं ने संभाली धान रोपाई
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केरल। धान की खेती के सीजन में महिला मजदूरों की कमी से परेशान किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। मजदूरों की कमी की समस्या को दूर करने के लिए महिलाओं के एक समूह ने आगे बढ़कर पहल की है। नेनमेनी पंचायत में आदिवासी समुदाय की महिलाओं को एकजुट कर खेती के क्षेत्र में एक विशेष टास्क फोर्स तैयार की गई है।

इस समूह ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल करते हुए धान की रोपाई का काम पूरा किया। आदिवासी समुदाय की 11 महिलाओं ने मिलकर पटियांबम क्षेत्र के धान के खेतों में चार एकड़ भूमि पर धान की रोपाई की।

मजदूरों की कमी से परेशान थे किसान

धान की खेती में रोपाई का काम सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होता है। समय पर मजदूर नहीं मिलने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कई क्षेत्रों में खेती के लिए महिला मजदूरों की कमी बड़ी समस्या बन गई है। इसका असर फसल चक्र और उत्पादन पर भी पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए नेनमेनी पंचायत में महिलाओं को संगठित कर खेती के काम के लिए तैयार किया गया।

आदिवासी महिलाओं ने संभाली जिम्मेदारी

नेनमेनी पंचायत में बनाई गई इस टास्क फोर्स में आदिवासी समुदाय की महिलाओं को शामिल किया गया है।

समूह की महिलाओं ने न केवल खेतों में काम करने की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि यह भी साबित किया कि अगर सही अवसर और प्रशिक्षण मिले तो महिलाएं कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

पहले प्रयास में ही समूह की 11 महिलाओं ने चार एकड़ खेत में धान की रोपाई कर किसानों को बड़ी राहत दी।

थंकामणि ने किया नेतृत्व

इस पहल का नेतृत्व पटियांबम निवासी और धान किसान थंकामणि ने किया।

थंकामणि खुद धान की खेती से जुड़ी हुई हैं और उन्हें खेती के अनुभव का लाभ इस समूह को मिला।

उन्होंने महिलाओं को संगठित करने, काम की योजना बनाने और खेतों में रोपाई की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

किसानों को मिली बड़ी राहत

किसानों का कहना है कि मजदूरों की कमी के कारण धान की खेती प्रभावित हो रही थी।

समय पर रोपाई न होने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

महिलाओं की इस पहल से किसानों को समय पर खेतों में काम पूरा करने में मदद मिली है।

महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर

यह पहल केवल किसानों की समस्या का समाधान नहीं कर रही, बल्कि आदिवासी महिलाओं के लिए रोजगार का नया अवसर भी पैदा कर रही है।

खेती से जुड़कर महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं और परिवार की आय में योगदान दे सकती हैं।

कृषि क्षेत्र में महिला भागीदारी बढ़ाने की कोशिश

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। बीज बोने से लेकर कटाई तक महिलाएं खेती के कई कामों में योगदान देती हैं।

नेनमेनी पंचायत की यह पहल महिला भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

सफल शुरुआत से बढ़ी उम्मीद

टास्क फोर्स का पहला प्रयास सफल होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस समूह को और विस्तार दिया जाएगा।

अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा सकता है, जिससे किसानों को मजदूरों की कमी से राहत मिलेगी।

आदिवासी समुदाय की महिलाओं का बढ़ा आत्मविश्वास

इस पहल से जुड़ी महिलाओं में भी उत्साह है। उनका कहना है कि खेती के क्षेत्र में काम करके उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।

उन्होंने साबित किया है कि मेहनत और सामूहिक प्रयास से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है।

खेती में नई पहल का संदेश

नेनमेनी पंचायत की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक उदाहरण बन सकती है।

जहां एक ओर किसान मजदूरों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं का संगठित होकर आगे आना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

धान की खेती में आदिवासी महिलाओं की यह टास्क फोर्स भविष्य में किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सहारा बन सकती है।

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