
वेल्लामुंडा/थोंडारनाडू: आदिवासी परिवारों के पुनर्वास के लिए शुरू की गई योजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। शिकायत है कि आदिवासी विभाग इस पुनर्वास प्रोजेक्ट में सक्रिय रूप से शामिल नहीं हो रहा है, जिसके कारण वेल्लामुंडा और थोंडारनाडू पंचायतों में चल रही पुनर्वास योजनाएं करीब आठ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी हैं।
स्थानीय लोगों और संबंधित अधिकारियों के अनुसार, आदिवासी परिवारों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट अब तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया है। विभागों के बीच समन्वय की कमी और कई प्रशासनिक अड़चनों के कारण बड़ी संख्या में परिवार अभी भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं।
हाल ही में वेल्लामुंडा पंचायत के वलारामकुन्नू आदिवासी इलाके में पुनर्वास परियोजना के पहले चरण के तहत बनाए गए 27 घरों का उद्घाटन किया गया। यह परियोजना राजस्व विभाग और अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई थी। निर्मिथी केंद्र द्वारा तैयार किए गए इन 27 घरों का निर्माण अब पूरा हो चुका है।
इन घरों के बनने से कुछ आदिवासी परिवारों को नया आशियाना मिल गया है, लेकिन परियोजना का पूरा लक्ष्य अभी हासिल नहीं हो पाया है। अधिकारियों के अनुसार, इसी क्षेत्र में 30 और घरों का निर्माण जारी है। इसके अलावा 17 अन्य परिवारों के पुनर्वास के लिए अभी जमीन की तलाश करनी होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्वास योजना को जल्द पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए। उनका आरोप है कि आदिवासी विभाग की पर्याप्त भागीदारी नहीं होने के कारण परियोजना की गति धीमी हुई है।
आदिवासी पुनर्वास योजनाओं का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाना है, जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जंगल क्षेत्रों या अन्य जोखिम वाले इलाकों में रह रहे हैं। इन परिवारों को बेहतर आवास, बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
हालांकि, जमीन की उपलब्धता, प्रशासनिक मंजूरी और विभागीय समन्वय जैसी समस्याओं के कारण कई पुनर्वास परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं। वेल्लामुंडा और थोंडारनाडू पंचायतों में भी इसी तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वलारामकुन्नू क्षेत्र में परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में बने 27 घरों का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी घरों के निर्माण को भी जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन अब उन परिवारों के लिए जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया में जुटेगा, जिन्हें अभी तक पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है। अधिकारियों के अनुसार, जमीन मिलने के बाद ही बाकी परिवारों के लिए आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद कुछ परिवारों को घर मिलने से राहत मिली है, लेकिन पूरे क्षेत्र में पुनर्वास योजना को पूरा होने में अभी समय लग सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर परियोजना को जल्द पूरा किया जाए।
आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि केवल घर बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पुनर्वास क्षेत्रों में पानी, बिजली, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। तभी परिवारों का वास्तविक रूप से पुनर्वास संभव हो पाएगा।
फिलहाल वलारामकुन्नू में परियोजना का काम आगे बढ़ रहा है, लेकिन वेल्लामुंडा और थोंडारनाडू पंचायतों में लंबित पुनर्वास योजनाओं को पूरा करना प्रशासन के लिए अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।





