केरल

युवा किसान दंपती की मेहनत, घर में खिला अनोखा बगीचा

Kavita2
29 July 2026 4:02 PM IST
युवा किसान दंपती की मेहनत, घर में खिला अनोखा बगीचा
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पलक्कड़। केरल के पथिरिपाला में खेती के प्रति जुनून और प्रकृति से लगाव की एक खूबसूरत मिसाल देखने को मिल रही है। यहां एक युवा परिवार ने अपने घर और आसपास की जमीन को हरियाली से भरकर एक शानदार बगीचे और फलों के बागान में बदल दिया है। करकुलम निवासी अनस ज़ाकिर और उनकी पत्नी शेमिना ने अपने प्रयासों से घर के अंदर और बाहर कई तरह के फूलों और फलों के पौधे लगाए हैं।

करीब 10 सेंट जमीन पर तैयार किया गया यह बगीचा अब स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां देश-विदेश की कई प्रजातियों के फलदार पेड़ और सजावटी पौधे देखने को मिलते हैं। खेती और बागवानी के प्रति इस परिवार का समर्पण उनके घर को एक खूबसूरत हरित परिसर में बदल चुका है।

पिता से मिली खेती की प्रेरणा

अनस ज़ाकिर के इस प्रयास के पीछे उनके पिता मयनकुट्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पथिरिपाला के मयनकुट्टी इलाके के जाने-माने किसान थे और उन्हें खेती-बाड़ी से गहरा लगाव था।

पिता से मिली खेती की प्रेरणा ने अनस ज़ाकिर को भी पौधों और मिट्टी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। फूलों, फलों और प्राकृतिक खेती के प्रति रुचि के चलते उन्होंने अपने घर के आंगन को धीरे-धीरे एक सुंदर बगीचे में बदलना शुरू किया।

घर बना फल और फूलों का खजाना

अनस और शेमिना के घर के अंदर और बाहर अब सौ से अधिक किस्मों के फूलों के पौधे लगे हुए हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजा यह परिसर देखने में बेहद आकर्षक लगता है।

इसके अलावा यहां कई दुर्लभ और विदेशी फलों के पेड़ भी लगाए गए हैं। इनमें पुलासन, रामबुटान, रागुन फल, सफेद जामुन, नागपुरी संतरा, मौसंबी, अभियु, शरीफा, जापानी अमरूद, अंबालांग, रोलिनिया, मैंगोस्टीन, मारामंत्री, बुश ऑरेंज और मिरेकल फ्रूट जैसे फल शामिल हैं।

इन पौधों की खासियत यह है कि इनमें से कई ऐसी प्रजातियां हैं जो आमतौर पर हर जगह आसानी से देखने को नहीं मिलतीं।

विदेशी फलों की खेती में रुचि

अनस ज़ाकिर ने अपने बगीचे में केवल पारंपरिक फलों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अलग-अलग देशों में पाए जाने वाले फलों के पौधों को भी जगह दी है।

उनका उद्देश्य केवल फल उत्पादन करना नहीं है, बल्कि लोगों को विभिन्न प्रकार के पौधों और बागवानी की संभावनाओं से परिचित कराना भी है। इस प्रयास से उनके घर का बगीचा एक छोटे स्तर के फल अनुसंधान केंद्र जैसा दिखाई देने लगा है।

मिट्टी से जुड़ाव ने बदली घर की तस्वीर

अनस और शेमिना का कहना है कि पौधों की देखभाल और खेती उनके लिए केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है। खाली जगहों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे घर के आसपास हरियाली बढ़ाई।

नियमित देखभाल, सही तकनीक और पौधों के प्रति लगाव के कारण आज उनका बगीचा कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

स्थानीय लोगों में बढ़ा आकर्षण

इस अनोखे बगीचे को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंचते हैं। कई लोग यहां आकर अलग-अलग किस्मों के पौधों के बारे में जानकारी लेते हैं और अपने घरों में भी बागवानी करने के लिए प्रेरित होते हैं।

स्थानीय स्तर पर यह पहल लोगों को खेती और प्रकृति से जुड़ने का संदेश दे रही है। खासकर युवाओं के लिए अनस और शेमिना का प्रयास यह दिखाता है कि सीमित जगह में भी हरियाली और फल उत्पादन संभव है।

प्रकृति संरक्षण की दिशा में प्रयास

आज जब शहरीकरण के कारण हरियाली कम होती जा रही है, ऐसे समय में घरों में बगीचे तैयार करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

अनस ज़ाकिर का परिवार न केवल अपने लिए फल और फूल उगा रहा है, बल्कि आसपास के लोगों को भी पौधों के महत्व और खेती के प्रति जागरूक कर रहा है।

पथिरिपाला का यह छोटा सा घर अब अपनी हरियाली, विविध पौधों और खेती के प्रति समर्पण के कारण खास पहचान बना चुका है। अनस और शेमिना की मेहनत ने साबित किया है कि लगन और प्रकृति प्रेम से किसी भी जगह को सुंदर और उपयोगी बनाया जा सकता है।

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