केरल
एक्सपायरी दवा का शक: निपाह मरीजों के मामले में बैठा मेडिकल बोर्ड
Tara Tandi
29 Oct 2026 4:44 PM IST

x
तिरुवनंतपुरम: स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने विधानसभा को बताया कि कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में निपाह मरीजों को दी गई रेमडेसिविर दवा के एक्सपायर (समय सीमा समाप्त) होने का संदेह है। मंत्री ने बताया कि 2021 में खरीदी गई इस दवा की एक्सपायरी डेट मई 2023 तक थी, लेकिन इसका इस्तेमाल 2024 और 2025 में भी किया गया। उन्होंने आगे बताया कि एक नए गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा इस बात की जांच की जाएगी कि क्या निपाह संक्रमित मरीजों की मौत इस एक्सपायर हो चुकी दवा के इस्तेमाल के कारण हुई है।
के. मुरलीधरन ने विधानसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि 2023 में एक्सपायर हो चुकी रेमडेसिविर दवा, 2023, 2024 और 2025 में निपाह मरीजों को दी गई हो सकती है। यह दवा 30 मई 2023 को एक्सपायर हो गई थी, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि इसके बाद के वर्षों में भी इसका इस्तेमाल होता रहा। यह जानकारी विधायक मैथ्यू कुझलनादान द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में दी गई।
विधायक के सवाल पर के. मुरलीधरन का जवाब:
‘रेमडेसिविर एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल निपाह और कोविड-19 जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के प्रयासों के तहत, मरीजों के इलाज और जान बचाने के लिए रेमडेसिविर को केवल 'केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड' (KMSCL) के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थानों में वितरित किया गया था।’
KMSCL की 'करुण्य योजना' के तहत रेमडेसिविर की आखिरी खरीद 3 जून 2021 को हुई थी। खरीदी गई 3,000 शीशियों (vials) की कुल कीमत 42 लाख रुपये थी। इस खरीद के जरिए उपलब्ध कराई गई रेमडेसिविर की एक्सपायरी डेट 30 मई 2023 थी।
चूंकि रेमडेसिविर 'आवश्यक दवाओं' (essential medicines) की श्रेणी में आती है और इसके लिए कोई बोली (bidding) नहीं लगाई जाती, इसलिए इसे केवल 'करुण्य योजना' के माध्यम से ही खरीदा गया था। कोझिकोड मेडिकल कॉलेज से मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 वित्तीय वर्ष में रेमडेसिविर की 102 शीशियां, 2024-25 में 34 शीशियां, 2025-26 में 10 शीशियां और 2026-27 में 50 शीशियां इस्तेमाल की गईं। हालांकि, 2026-27 वित्तीय वर्ष में इस्तेमाल की गई 50 शीशियां 12 जून 2026 को बहरीन से लाई गई थीं और इन्हें निपाह के एक मरीज को दिया गया था।
इन हालात को देखते हुए, कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के अस्पताल रिकॉर्ड से यह संदेह पैदा होता है कि 2023, 2024 और 2025 में मरीजों को दी गई रेमडेसिविर एक्सपायर हो चुकी थी। इसलिए, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) के माध्यम से निर्देश जारी किए गए हैं कि उन सभी मरीजों का विवरण इकट्ठा किया जाए, जिन्हें इसी तरह रेमडेसिविर दी गई थी।
2023 में सामने आए निपाह के छह मामलों में से दो मरीजों की मौत हो गई। 2024 में सामने आए दो मामलों में दोनों मरीजों की मौत हो गई, जबकि 2025 में सामने आए तीन मरीजों में से दो की मौत हो गई। 2026 में निपाह का एक मामला सामने आया था, और वह मरीज ठीक हो गया।
संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अरविंद की अध्यक्षता में एक मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए जाएंगे। यह बोर्ड इस बात की विस्तृत जांच करेगा कि क्या निपाह मरीजों की मौत एक्सपायर हो चुकी दवा के इस्तेमाल से हुई थी, और क्या जिन अन्य मरीजों को यह दवा दी गई थी, उन पर कोई बुरा असर पड़ा।
Next Story





