केरल

विशेष बच्चों की खेती में शानदार पहल को राज्य कृषि विभाग का सम्मान

Kavita2
10 Aug 2026 4:36 PM IST
विशेष बच्चों की खेती में शानदार पहल को राज्य कृषि विभाग का सम्मान
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अदिमाली। अपनी शारीरिक और अन्य चुनौतियों को पीछे छोड़कर खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले विशेष बच्चों और उनके शिक्षकों की मेहनत को राज्य स्तर पर सम्मान मिला है। राज्य कृषि विभाग की ओर से विशेष स्कूलों को दिए जाने वाले पुरस्कार के तहत अदिमाली स्थित माचिप्लांव कार्मेल ज्योति स्पेशल स्कूल को स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा कृषि गतिविधियों में किए जा रहे निरंतर और सराहनीय प्रयासों के लिए दिया गया है।

स्कूल के 190 से अधिक विद्यार्थी खेती से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हैं। इनमें खास तौर पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के विद्यार्थी कृषि कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते हैं। विद्यार्थियों को खेत की तैयारी से लेकर पौधों की देखभाल और फसल से जुड़ी अन्य गतिविधियों में शामिल किया जाता है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

मेहनत और टीमवर्क को मिली पहचान

राज्य कृषि विभाग का यह सम्मान उन विद्यार्थियों और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने मिलकर कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाया। विशेष बच्चों के लिए खेती का काम केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि सीखने और आत्मनिर्भर बनने का माध्यम बनाया गया है।

स्कूल में विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार कृषि कार्यों से जोड़ा जाता है। शिक्षक उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन देते हैं और विद्यार्थी खुद खेतों में काम करते हैं। इससे उन्हें प्रकृति, मिट्टी, पौधों और खेती की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

190 से ज्यादा विद्यार्थी कृषि गतिविधियों से जुड़े

स्कूल के 190 से अधिक विद्यार्थी कृषि गतिविधियों का हिस्सा हैं। इनमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के विद्यार्थी विशेष रूप से खेतों में सीधे काम करते हैं।

विद्यार्थियों को खेती की बुनियादी प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाता है। वे मिट्टी तैयार करने, पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने और खेती से संबंधित अन्य कामों में भाग लेते हैं। इस दौरान उन्हें समूह में काम करने, जिम्मेदारी निभाने और अपने काम का परिणाम देखने का अवसर मिलता है।

स्कूल प्रबंधन के अनुसार, कृषि कार्यों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उनकी कार्यक्षमता को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मिट्टी से जुड़ाव बना आत्मनिर्भरता का माध्यम

स्कूल की डायरेक्टर सिस्टर बिजी जोस ने कहा कि मिट्टी पर काम करना बच्चों के जीवन-यापन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि खेती से विद्यार्थियों को प्रकृति के साथ जुड़ने का अवसर मिलता है। पौधों को बढ़ते हुए देखना और अपनी मेहनत का परिणाम प्राप्त करना बच्चों के लिए सीखने का विशेष अनुभव है।

प्रकृति के प्रति जागरूकता पर जोर

स्कूल की कृषि गतिविधियों में पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जागरूकता को भी महत्व दिया जाता है। विद्यार्थियों को मिट्टी और पौधों की देखभाल के साथ प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में समझाया जाता है।

खेती के माध्यम से बच्चों को यह समझने का अवसर मिलता है कि भोजन हमारे खेतों तक कैसे पहुंचता है और एक फसल तैयार करने में कितनी मेहनत लगती है। इससे उनमें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में भी मदद मिलती है।

शिक्षकों की भूमिका भी अहम

इस पूरी पहल में स्कूल के शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग कृषि कार्य सौंपे जाते हैं। शिक्षक खेतों में उनके साथ रहते हैं और आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन करते हैं।

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयास से ही कृषि गतिविधियों को सफल बनाया जा सका है। राज्य कृषि विभाग का पुरस्कार इसी टीमवर्क की पहचान है।

विशेष बच्चों के लिए रोजगार कौशल का आधार

विशेष बच्चों के लिए भविष्य में आत्मनिर्भर जीवन की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में खेती जैसे व्यावहारिक कौशल उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर सकते हैं।

स्कूल में कृषि कार्यों को इसी दृष्टिकोण से बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप जिम्मेदारियां देकर उनमें काम करने की आदत, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित किया जा रहा है।

पुरस्कार से बढ़ा विद्यार्थियों का उत्साह

राज्य स्तर पर सम्मान मिलने से स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों में उत्साह बढ़ा है। यह पुरस्कार न केवल उनके अब तक के प्रयासों को पहचान देता है, बल्कि भविष्य में कृषि गतिविधियों को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित भी करता है।

स्कूल प्रबंधन को उम्मीद है कि इस सम्मान के बाद विशेष बच्चों को कृषि और अन्य व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों को और प्रोत्साहन मिलेगा।

दूसरों के लिए भी प्रेरणा

माचिप्लांव कार्मेल ज्योति स्पेशल स्कूल की यह पहल यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर विशेष बच्चे भी अपनी क्षमताओं का प्रभावी प्रदर्शन कर सकते हैं। खेती के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया जा रहा है।

राज्य कृषि विभाग का सम्मान इस प्रयास को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। 190 से अधिक विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के सहयोग और स्कूल प्रबंधन की सोच ने इस पहल को एक ऐसी मिसाल बना दिया है, जो अन्य विशेष स्कूलों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है।

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