
Kerala केरल: अभिनेत्री श्वेता मेनन ने एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (एएमएमए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफे को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उन्होंने यह पद इसलिए छोड़ा क्योंकि वे किसी के लिए “कठपुतली” बनकर काम नहीं कर सकती थीं और उन्होंने आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी।
श्वेता मेनन ने कहा कि संगठन में काम करने के दौरान उन्हें ऐसे हालात का सामना करना पड़ा, जहां स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना संभव नहीं रह गया था। उनके अनुसार, जब किसी पद पर रहते हुए स्वतंत्रता सीमित हो जाए, तो आत्मसम्मान के साथ समझौता करना उचित नहीं होता।
गौरतलब है कि श्वेता मेनन और एएमएमए की 17 सदस्यीय कार्यकारी समिति ने 21 जून को संगठन की वार्षिक आम सभा बैठक के दौरान इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा उस समय आया जब बैठक में तीखी बहस और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले थे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान संगठन के भीतर कई मुद्दों को लेकर असहमति सामने आई थी, जिसके चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इसी तनाव के बीच कार्यकारी समिति के सभी सदस्यों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा देने का फैसला किया।
I RESIGNED BECAUSE I REFUSED TO BE A PUPPET - SHWETA MENON ON AMMA
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) June 24, 2026
Former AMMA president Shwetha Menon has alleged that "vested interests" within the organisation prevented her committee from probing alleged wrongdoing by members of the previous administration
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श्वेता मेनन ने कहा कि उनका निर्णय व्यक्तिगत नहीं बल्कि परिस्थितियों से प्रेरित था, जहां कामकाज के तरीके और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर मतभेद थे।
एएमएमए के भीतर हुए इस घटनाक्रम को मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि संगठन लंबे समय से कलाकारों के हितों का प्रतिनिधित्व करता रहा है।
फिलहाल संगठन की आगे की कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और नए नेतृत्व के गठन की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
श्वेता मेनन के इस बयान के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है, और फिल्म इंडस्ट्री में संगठनात्मक पारदर्शिता और नेतृत्व शैली को लेकर बहस तेज हो गई है।





