केरल

केरल के पोन्नानी तट पर समुद्र का कटाव तेज, चार घर तबाह

Kavita2
2 Aug 2026 3:13 PM IST

मलप्पुरम। केरल के मलप्पुरम जिले के पोन्नानी तालुक में पिछले दो दिनों से समुद्र का कटाव (सी इरोजन) लगातार तेज होता जा रहा है। उफनते समुद्र और ऊंची लहरों ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पोन्नानी अझिक्कल से लेकर पुथु पोन्नानी तक नगरपालिका क्षेत्र तथा वेलियानकोड और पेरुमपाडप्पू पंचायतों के कई हिस्सों में समुद्र तेजी से तट को काट रहा है। लगातार बढ़ते कटाव के कारण कई घरों को नुकसान पहुंचा है, जबकि सैकड़ों परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए रखी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही प्रभावी तटीय सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

कई तटीय क्षेत्रों में बढ़ा खतरा

समुद्र की तेज लहरें पोन्नानी लाइटहाउस क्षेत्र, मारकडावु, मुक्काडी, अलियार चर्च, एमईएस के पीछे का इलाका, मुरिन्झाझी, पुलिस स्टेशन के पीछे, मुल्ला रोड, पुथु पोन्नानी, वेलियानकोड थन्नीथुरा, पटुमरी और पालापेट्टी के अजमेर नगर सहित कई स्थानों पर तट से टकरा रही हैं।

इन इलाकों में समुद्र लगातार जमीन को काट रहा है, जिससे तटीय क्षेत्र सिकुड़ते जा रहे हैं। कई स्थानों पर समुद्र की लहरें घरों और सड़कों के बेहद करीब पहुंच गई हैं।

चार घर पूरी तरह तबाह, कई क्षतिग्रस्त

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में वेलियानकोड का थन्नीथुरा इलाका शामिल है। यहां समुद्र के कटाव के कारण चार घर पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, जबकि कम से कम 15 अन्य मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, लहरों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग की है।

100 से अधिक घरों में घुसा समुद्र का पानी

लगातार उठ रही ऊंची लहरों के कारण लगभग 100 घरों में समुद्री पानी घुस गया। घरों में पानी भरने से घरेलू सामान, फर्नीचर और बिजली के उपकरणों को नुकसान पहुंचा है।

कई परिवारों को रातभर पानी निकालने और सामान सुरक्षित करने में जुटे रहना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान समुद्र का कटाव बढ़ता है, लेकिन इस बार स्थिति पहले की तुलना में अधिक गंभीर दिखाई दे रही है।

50 मीटर के दायरे में बसे हैं अधिकांश घर

प्रभावित इलाके के अधिकांश मकान समुद्र तट से लगभग 50 मीटर की दूरी पर बने हुए हैं। ऐसे में तेज लहरों का सीधा असर इन घरों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे तटीय कटाव के कारण भविष्य में इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। स्थानीय निवासी लंबे समय से मजबूत समुद्री सुरक्षा दीवार और अन्य तटीय संरक्षण परियोजनाओं की मांग कर रहे हैं।

हाई टाइड के समय बढ़ जाता है खतरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर से शाम के बीच जब ज्वार (हाई टाइड) आता है, तब समुद्र की लहरें अत्यधिक ऊंची होकर तट से टकराती हैं। इसी दौरान कटाव सबसे अधिक होता है और घरों तथा सड़कों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

लोगों ने बताया कि हर दिन हाई टाइड के समय भय का माहौल बन जाता है और परिवार सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी में रहते हैं।

नारियल के पेड़ों पर भी संकट

समुद्र के कटाव का असर केवल मकानों तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में सैकड़ों नारियल के पेड़ों की जड़ें भी कटाव के कारण कमजोर हो गई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पेड़ कभी भी गिर सकते हैं, जिससे जान-माल का अतिरिक्त खतरा पैदा हो गया है। कई स्थानों पर पेड़ों के झुकने के कारण लोगों ने उन इलाकों में आवाजाही कम कर दी है।

प्रशासन की निगरानी, राहत की उम्मीद

स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।

आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय निकायों की टीमें भी तटीय इलाकों का निरीक्षण कर रही हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे समुद्र के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

स्थायी समाधान की मांग तेज

हर वर्ष मानसून के दौरान पोन्नानी और आसपास के तटीय क्षेत्रों में समुद्र का कटाव बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्थायी उपायों के बजाय सरकार को तटीय सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान अपनाना चाहिए।

निवासियों ने मजबूत सी-वॉल, तट संरक्षण परियोजनाओं और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में समुद्र का कटाव और अधिक तबाही मचा सकता है।

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