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राज्यपाल के निर्देश पर उठे सवाल
तिरुवनंतपुरम: केरलम के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के लोकभवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और माकपा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे खानपान की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़ा है। दूसरी ओर, लोकभवन के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि राज्यपाल स्वयं पूर्ण शाकाहारी हैं और निर्देश उनके लिए भोजन तैयार करने वाली रसोई से संबंधित है। कर्मचारियों की व्यक्तिगत भोजन पसंद पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को राज्यपाल पद की शपथ ली। इसके साथ ही रसोई से संबंधित निर्देश राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विवाद का केंद्र यह सवाल है कि राज्यपाल की निजी भोजन पसंद के अनुसार आधिकारिक आवास की रसोई का संचालन कहां तक उचित है। कांग्रेस इसे संस्थागत व्यवस्था पर व्यक्तिगत पसंद लागू करने का मामला बता रही है, जबकि लोकभवन पक्ष का कहना है कि संबंधित रसोई मुख्य रूप से राज्यपाल के भोजन के लिए है।
केसी वेणुगोपाल ने जताई कड़ी आपत्ति
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने कथित निर्देश की आलोचना की है। उनका कहना है कि राज्यपाल को अपनी पसंद का शाकाहारी भोजन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन उस पसंद को लोकभवन की रसोई के संचालन का एकमात्र आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। वेणुगोपाल ने केरलम की विविध खाद्य संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की स्वतंत्रता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोजन संबंधी ऐसी पाबंदियां व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करती हैं। उन्होंने निर्णय वापस लेने की मांग भी की। संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन संबंधी उनकी टिप्पणी राजनीतिक आरोप है; इस विषय पर किसी अदालत का निर्णय सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लोकभवन ने कर्मचारियों पर पाबंदी से किया इनकार
लोकभवन के सूत्रों के अनुसार, माथुर ने उस रसोई में मांसाहारी भोजन नहीं बनाने के लिए कहा है, जहां उनके लिए खाना तैयार होता है। सूत्रों का कहना है कि वहां का भोजन राज्यपाल और उनके कुछ निजी कर्मचारियों के लिए होता है। अन्य कर्मचारी अपना खाना घर से लाते हैं या बाहर भोजन करते हैं। इस स्पष्टीकरण के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी पसंद का भोजन खाने से नहीं रोका गया है। इसलिए पूरे लोकभवन परिसर में मांसाहारी भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगने का निष्कर्ष निकालना उपलब्ध जानकारी से सही नहीं होगा। विवाद को समझने के लिए रसोई में बनने वाले भोजन और कर्मचारियों की व्यक्तिगत भोजन स्वतंत्रता के बीच यह अंतर महत्वपूर्ण है।
माकपा ने भी उठाए सवाल
माकपा के प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने भी भोजन की पसंद को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि खानपान को राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने भी कहा कि दूसरों के भोजन का निर्णय करना उचित नहीं है। इन प्रतिक्रियाओं से बहस राज्यपाल की निजी भोजन पसंद से आगे बढ़कर सार्वजनिक संस्थानों की कार्यप्रणाली तक पहुंच गई है। हालांकि, राजनीतिक दलों के आरोपों के साथ लोकभवन का यह स्पष्टीकरण भी सामने है कि कर्मचारियों की भोजन संबंधी स्वतंत्रता बरकरार है।
रसोई की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग तर्क
लोकभवन के सूत्रों ने संबंधित रसोई को राज्यपाल की भोजन संबंधी जरूरतों के लिए संचालित व्यवस्था बताया है। उनके अनुसार, राज्यपाल को अपनी पसंद के भोजन और रसोइए की व्यवस्था करने का अधिकार है। पूर्व राज्यपाल के कार्यकाल में उनके गृह राज्य के व्यंजन बनाने के लिए अलग रसोइए की व्यवस्था होने का उदाहरण भी दिया गया। आलोचकों का तर्क है कि आधिकारिक आवास की व्यवस्था को केवल निजी घर की रसोई की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों के तर्कों में मुख्य अंतर रसोई के स्वरूप और उसके उपयोग को लेकर है। एक पक्ष इसे राज्यपाल की व्यक्तिगत जरूरतों से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा संस्थागत परंपरा और विविधता का प्रश्न उठा रहा है।
शपथ के साथ शुरू हुई राजनीतिक बहस
माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल थे। केरलम में उन्होंने राजेंद्र अर्लेकर का स्थान लिया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सामने आए इस विवाद ने उनके कार्यकाल की शुरुआत को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुद्दे को खानपान की आजादी से जोड़कर उठाया है। फिलहाल सामने आई जानकारी में कथित निर्देश का दायरा और उसके प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। लोकभवन के सूत्र कर्मचारियों पर किसी पाबंदी से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि इस स्पष्टीकरण के बाद विवाद शांत होता है या राजनीतिक दल आगे भी अपनी आपत्ति बनाए रखते हैं। किसी नए निर्णय या बदलाव की पुष्टि होने तक रसोई संबंधी निर्देश को पूरे राज्य की खाद्य नीति से जोड़ना उचित नहीं होगा।
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