
इडुक्की: इलायची की बढ़ती कीमतों ने जहां किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद दी है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी इलाकों में चोरी की घटनाओं ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। बाजार में हरी इलायची की मांग और ऊंचे दामों के कारण अब इलायची के बागान और गोदाम चोरों के निशाने पर आने लगे हैं।
किसानों के अनुसार, पहले इलायची चोरी की घटनाएं इतनी आम नहीं थीं, लेकिन अब कीमतों में बढ़ोतरी के साथ बागानों से तैयार इलायची चोरी होने के मामले बढ़ रहे हैं। चोर खासतौर पर उन फलों को निशाना बना रहे हैं, जो पूरी तरह पक चुके होते हैं और बाजार में आसानी से बेचे जा सकते हैं।
इलायची की चोरी का पता तुरंत नहीं चल पाता, क्योंकि चोर केवल चुनिंदा पके हुए फलों को तोड़ते हैं। वे पूरे पौधे या बड़ी मात्रा में नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे किसान को कई बार कई दिनों बाद नुकसान का अंदाजा होता है। जब किसान बागान का निरीक्षण करते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि तैयार फसल का एक हिस्सा गायब हो चुका है।
किसानों का कहना है कि इलायची की खेती में काफी मेहनत और खर्च लगता है। पौधों की देखभाल, सिंचाई, खाद और मजदूरी पर बड़ी राशि खर्च होती है। ऐसे में जब तैयार फसल चोरी हो जाती है तो किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।
इलायची उत्पादक क्षेत्रों में चोरी का एक और कारण यह बताया जा रहा है कि चोर अक्सर मजदूरों का भेष बदलकर बागानों में प्रवेश कर जाते हैं। वे ऐसे समय को चुनते हैं जब बागान में निगरानी करने वाला कोई व्यक्ति मौजूद नहीं होता। मजदूरों की तरह दिखाई देने के कारण उन पर आसानी से संदेह भी नहीं होता।
किसानों के अनुसार, कई बार बाहरी लोगों को बागानों की जानकारी जुटाते हुए देखा गया है। वे पहले इलाके, फसल की स्थिति और बागान मालिकों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके बाद मौका देखकर चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं।
इलायची के गोदामों में भी चोरी की घटनाएं बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बड़ी मात्रा में जमा की गई इलायची को चोर निशाना बना रहे हैं, क्योंकि यहां से चोरी की गई फसल को बेचकर उन्हें अधिक फायदा मिल सकता है।
इलायची कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण चोरी की गई इलायची को खपाना आसान हो जाता है। यही वजह है कि चोरी की घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।
किसानों ने अब बागानों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। कई किसान रात के समय निगरानी बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरे लगाने और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन से भी किसानों ने अपील की है कि इलायची उत्पादक क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाए। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो चोरी की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों की कीमत बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। खासकर पहाड़ी इलाकों में फैले बड़े-बड़े बागानों की निगरानी करना किसानों के लिए मुश्किल होता है।
इलायची की खेती कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में चोरी की बढ़ती घटनाएं केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि किसानों के वर्षों के परिश्रम पर भी असर डालती हैं।
फिलहाल इलायची उत्पादक क्षेत्रों में किसान सतर्क हो गए हैं और अपनी फसल की सुरक्षा के लिए नए उपाय अपना रहे हैं। आने वाले समय में चोरी रोकने के लिए किसानों, पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत महसूस की जा रही है।





