केरल

प्रसिद्ध मृदंगम वादक गुरुवयूर दोराई का निधन

Tara Tandi
11 Oct 2026 3:43 PM IST
प्रसिद्ध मृदंगम वादक गुरुवयूर दोराई का निधन
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चेन्नई: मशहूर मृदंगम वादक और पद्म श्री से सम्मानित गुरुवायुर दोराई का निधन हो गया है। वे 91 साल के थे। उन्होंने चेन्नई में आखिरी सांस ली। मूल रूप से गुरुवायुर के रहने वाले दोराई कर्नाटक संगीत की दुनिया में एक खास हस्ती थे और मृदंगम बजाने के अपने अनोखे अंदाज़ के लिए जाने जाते थे। उन्होंने आठ साल की उम्र में अपना पहला परफॉर्मेंस दिया था, जिसमें उन्होंने चेम्बई वैद्यनाथ भागवतार के कॉन्सर्ट में संगत की थी। वे लगभग आठ दशकों तक संगीत के क्षेत्र में सक्रिय रहे और मृदंगम बजाने की पुडुकोट्टई शैली के प्रमुख कलाकार थे।
दोराई का जन्म 2 जुलाई 1935 को गुरुवायुर में जी.एस. कृष्णा अय्यर और मीनाक्षी के घर हुआ था। पांच साल की उम्र में पोलियो होने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसके बाद उनके पिता ने उन्हें मृदंगम सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग पलक्कड़ सुब्बयार और ई.पी. नारायण पिशारोडी से ली। 1949 में मशहूर मृदंगम वादक पलानी सुब्रमण्यम पिल्लई से मुलाकात दोराई के जीवन का एक अहम मोड़ साबित हुई।
इसके बाद वे चेन्नई चले गए और लगभग नौ साल तक पिल्लई के घर पर रहकर गुरुकुल परंपरा के तहत मृदंगम सीखा। दोराई ने कर्नाटक संगीत के कई दिग्गज कलाकारों के साथ संगत की, जिनमें एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, मुसिरी सुब्रमण्यम अय्यर, चेम्बई वैद्यनाथ भागवतार, सेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर, एम.डी. रामनाथन, एम. बालमुरलीकृष्ण और टी.आर. महालिंगम शामिल हैं। उन्होंने फिल्म 'निराकुडम' के लोकप्रिय गाने 'नक्षत्र दीपांगल थिलांगी' के लिए भी मृदंगम बजाया था। देश ने उन्हें 2025 में पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्हें मिले अन्य सम्मानों में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी टैगोर रत्न, तमिलनाडु सरकार का कलाईमामणि पुरस्कार और संगीता कलासिखामणि शामिल हैं।
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