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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स हटा दें और लोगों को आज़ादी से आने-जाने दें। सरकार के इस भरोसे को मानते हुए कि मेट्रो सेवाएँ सामान्य हो जाएँगी, कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएँ बहाल करने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि वकीलों को उनके आधिकारिक काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए। कोर्ट दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को सरकार की अनदेखी करके कानून-व्यवस्था लागू नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए नागरिक आज़ादी को कम नहीं किया जाना चाहिए और जीवन तथा आज़ादी दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाओं को रिकॉर्ड पर लिया जा सकता है।
इस बीच, सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की इजाज़त देने का आदेश जारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से दिल्ली तक आने की इजाज़त मिलनी चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर के आस-पास चार किलोमीटर के दायरे से बाहर पाबंदियाँ लगाने का विरोध करते हुए एक अंतरिम आदेश की भी माँग की।
सिब्बल ने राहत पाने के लिए बार-बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने पर नाखुशी ज़ाहिर की। इसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि वह संस्था में उनका भरोसा बहाल करना चाहता है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के हालात को लेकर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और अन्य को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने उन्हें मंगलवार तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
इस बीच, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (DYFI) और ऑल-इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) जैसे संगठनों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में विरोध मार्च निकाला। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ज़बरदस्ती हटाने की कोशिश की। खबरों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी हैं।
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