केरल

सबरीमाला मंदिर प्रशासन को राहत, नए कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर हाई कोर्ट की मुहर

nidhi
18 July 2026 8:29 AM IST
सबरीमाला मंदिर प्रशासन को राहत, नए कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर हाई कोर्ट की मुहर
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों तथा नियमों का परीक्षण किया

Kerala : सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर के प्रशासन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नए कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer) की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। अदालत के इस फैसले से मंदिर प्रशासन में लंबे समय से चल रही अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमानुसार की गई है और मंदिर के सुचारु प्रशासन तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
सबरीमाला मंदिर के कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया और उससे जुड़े कुछ प्रशासनिक पहलुओं पर सवाल उठाए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों तथा नियमों का परीक्षण किया। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने नियुक्ति को वैध माना।
अदालत ने क्या कहा?
केरल हाई कोर्ट ने कहा कि—
नियुक्ति निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई है।
मंदिर प्रशासन को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कार्यकारी अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थानों का प्रशासन पारदर्शी और नियमसम्मत तरीके से संचालित होना चाहिए।
कार्यकारी अधिकारी की क्या होती है भूमिका?
सबरीमाला मंदिर के कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारियों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य शामिल होते हैं, जैसे—
मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी।
श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का प्रबंधन।
वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों का समन्वय।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर व्यवस्थाओं की देखरेख।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन में संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था का सुचारु होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की भूमिका
सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) के अधीन आता है। मंदिर के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और कर्मचारियों से जुड़े कई फैसले बोर्ड द्वारा लिए जाते हैं।
कार्यकारी अधिकारी मंदिर प्रशासन और देवस्वम बोर्ड के बीच समन्वय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
श्रद्धालुओं पर क्या होगा असर?
हाई कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर प्रशासन में स्थिरता आने की उम्मीद है। इससे—
दर्शन व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
भीड़ प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
त्योहारों और विशेष अवसरों की तैयारियां समय पर हो सकेंगी।
प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी।
आने वाले तीर्थ सीजन को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबरीमाला मंदिर का धार्मिक महत्व
केरल के पथानामथिट्टा जिले में स्थित सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर देश के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है। हर वर्ष भारत और विदेशों से करोड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
विशेष रूप से मंडलम और मकरविलक्कु सीजन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, जिसके कारण प्रशासनिक तैयारियों का विशेष महत्व होता है।

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