केरल

परंपरा के स्वाद को कारोबार में बदला, रेहाना ने खड़ा किया फूड बिजनेस

Kavita2
15 July 2026 3:31 PM IST
परंपरा के स्वाद को कारोबार में बदला, रेहाना ने खड़ा किया फूड बिजनेस
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अलप्पुझा : जब पारंपरिक स्वाद, मेहनत और हुनर एक साथ मिलते हैं तो एक नई पहचान बनती है। केरल के अलप्पुझा जिले के मन्ननचेरी स्थित चियामवेली की रहने वाली रेहाना नसरुद्दीन ने अपनी पारिवारिक रेसिपी और खाना बनाने के हुनर को कारोबार में बदलकर एक मिसाल पेश की है। आज वह न सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजनों के जरिए लोगों तक पारंपरिक जायका पहुंचा रही हैं, बल्कि कई स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर भी बना रही हैं।

रेहाना की कहानी विरासत में मिले स्वाद और अपने दम पर खड़ी की गई सफलता की कहानी है। उन्हें खाना बनाने की कला अपने पिता अब्दुल सलाम से मिली, जो अलप्पुझा में ‘ब्रुफिया’ नाम से मशहूर प्रतिष्ठान चलाते थे। बचपन से ही रेहाना अपने पिता के साथ रसोई में जाती थीं और उन्हें खाना बनाने की बारीकियां सीखने का मौका मिला।

पिता के साथ रहते हुए रेहाना ने पारंपरिक व्यंजनों की खासियत, मसालों के सही इस्तेमाल और स्वाद को बनाए रखने की कला सीखी। धीरे-धीरे उन्होंने कई ऐसी रेसिपी सीख लीं, जिनका स्वाद लोगों को खास पसंद आता था। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए एक सफल व्यवसाय की नींव बना।

शुरुआत में रेहाना अपने घर आने वाले मेहमानों के लिए अलग-अलग तरह के व्यंजन तैयार करती थीं। उनके हाथों से बने खाने की तारीफ हर कोई करता था। रिश्तेदारों और दोस्तों ने उन्हें सलाह दी कि वह अपनी इस कला को केवल घर तक सीमित न रखें, बल्कि इसे व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाएं।

लोगों की सराहना और लगातार मिल रहे प्रोत्साहन के बाद रेहाना ने फूड बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने पारंपरिक व्यंजनों को बाजार तक पहुंचाने की पहल की। धीरे-धीरे उनके बनाए व्यंजनों की मांग बढ़ने लगी और उनका छोटा प्रयास एक पहचान बन गया।

रेहाना का उद्देश्य सिर्फ अपना व्यवसाय बढ़ाना नहीं था। वह चाहती थीं कि उनके साथ आसपास की महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिलें। इसी सोच के साथ उन्होंने स्थानीय महिलाओं को अपने काम से जोड़ा। आज उनके साथ 10 से अधिक महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं और अपनी आय अर्जित कर रही हैं।

रेहाना का कहना है कि महिलाओं को अगर सही अवसर और मंच मिले तो वे अपनी प्रतिभा से बहुत आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने अपने काम के जरिए यह साबित किया है कि घरेलू हुनर को भी सही दिशा देकर एक सफल उद्यम में बदला जा सकता है।

उनके व्यवसाय में पारंपरिक स्वाद को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। रेहाना अपने पिता से सीखी गई पुरानी रेसिपी और पारंपरिक तरीकों को बनाए रखते हुए व्यंजन तैयार करती हैं। उनका प्रयास है कि लोगों तक ऐसा स्वाद पहुंचे, जिसमें घर के खाने की खुशबू और पुराने समय की परंपरा दोनों महसूस हों।

स्थानीय लोगों के बीच रेहाना के बनाए व्यंजनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ग्राहकों को उनके खाने में पारंपरिक स्वाद के साथ गुणवत्ता भी पसंद आती है। यही वजह है कि धीरे-धीरे उनका कारोबार मजबूत होता जा रहा है।

रेहाना की सफलता उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने हुनर के बावजूद आगे बढ़ने का मौका नहीं तलाश पातीं। उन्होंने दिखाया है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही सोच के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी पहचान बना सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय खाद्य उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने से न केवल संस्कृति को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। रेहाना का प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।

आज रेहाना नसरुद्दीन अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। स्वाद और आत्मनिर्भरता की उनकी यह यात्रा बताती है कि परंपरा और मेहनत का मेल सफलता की मजबूत कहानी लिख सकता है।

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