केरल
महाराष्ट्र चुनाव को लेकर रमेश चेन्निथला का बड़ा आरोप CEC से मांगा इस्तीफा
Ratna Netam
25 Sept 2026 6:03 PM IST

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थिरुवनंतपुरम : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व प्रभारी रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की हार चुनाव आयोग की कथित भूमिका के कारण हुई और इसे उन्होंने “चुनाव में धोखाधड़ी” करार दिया। चेन्निथला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं और चुनाव परिणामों में धांधली साबित होने का कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।मीडिया से बातचीत में चेन्निथला ने कहा कि वह महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रभारी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी चुनाव आयोग की “कृपालुता” के कारण चुनाव हार गए। उन्होंने इसे चुनावी धोखाधड़ी बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं और ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा देना चाहिए।
चेन्निथला ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमतियों का भी जिक्र किया। हाल में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता सूची के डेटा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।हालांकि इन 14 आपत्तियों की रिपोर्ट अपने आप में 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धोखाधड़ी साबित नहीं करती। रिपोर्ट की अवधि मुख्य रूप से अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच की बताई गई है, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था। इसलिए चेन्निथला द्वारा 2024 के चुनाव परिणाम को इन बाद की आंतरिक आपत्तियों से जोड़ना उनका राजनीतिक दावा है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। विपक्षी महा विकास अघाड़ी में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल थे। चुनाव परिणाम के बाद से कांग्रेस और उसके सहयोगी मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।चेन्निथला का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। शुक्रवार को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर सहित कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए और CEC के इस्तीफे की मांग उठाई।
नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पंजाब में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जहां पार्टी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।असम में भी विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस इकाइयों ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च करने की कोशिश की। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित आपत्तियों पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।
विवाद की पृष्ठभूमि में वह मीडिया जांच है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दस महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के विभिन्न कदमों पर आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे विषय शामिल थे। इसके बावजूद तीन सदस्यीय चुनाव आयोग कई प्रमुख मौकों पर संयुक्त रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों और ब्रीफिंग में शामिल हुआ।
इन रिपोर्टों के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव बढ़ाया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार विपक्ष संसद के दोनों सदनों में CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस देने की तैयारी भी कर रहा है। यह अभी राजनीतिक और संसदीय प्रक्रिया का विषय है और किसी अंतिम निर्णय की स्थिति नहीं है।वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का विरोध किया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।
चुनाव आयोग और CEC को लेकर विवाद केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। SIR के तहत मतदाता सूची में संशोधन, नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया तथा डेटा प्रबंधन को लेकर अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों ने सवाल उठाए हैं। मुंबई में इस प्रक्रिया से जुड़े 14 आदेशों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में मतदाता सूची से हटाए गए कुछ नामों को बहाल करने और प्रक्रिया की समीक्षा जैसी मांगें की गई हैं।
इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे चुनावी धोखाधड़ी के आरोप अलग-अलग दावे हैं। दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियां चुनाव आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों से संबंधित हैं, जबकि चेन्निथला ने इससे आगे बढ़कर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की हार को आयोग की भूमिका से जोड़ा है। इस दावे के समर्थन में किसी अदालत या वैधानिक जांच संस्था का ऐसा निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसने 2024 के महाराष्ट्र चुनाव परिणाम को धोखाधड़ी का नतीजा घोषित किया हो।
फिलहाल कांग्रेस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। चेन्निथला के बयान ने इसमें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का मुद्दा भी जोड़ दिया है। दूसरी ओर भाजपा विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है। चुनाव आयोग के भीतर कथित 14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।
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