
कोच्चि/केरल: अरूर और कुम्बलंगी के बीच चलने वाली फेरी सेवा को लेकर विवाद जारी है। जिस फेरी पियर से नियमित सेवा बंद कर दी गई थी, वहां फिलहाल अस्थायी रूप से शुरू की गई मोटर नाव सेवा अब भी संचालित हो रही है। हालांकि, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं और स्थानीय लोग प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, नियमित अरूर-कुम्बलंगी फेरी सेवा को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था। इसके बाद यात्रियों की परेशानी को देखते हुए जुलाई के मध्य में अस्थायी रूप से मोटर वाली नाव सेवा शुरू की गई। यह सेवा अभी भी जारी है और बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
पंचायत अधिकारियों ने पहले कहा था कि बंद की गई फेरी सेवा कुछ दिनों के भीतर दोबारा शुरू हो सकती है। लेकिन अब तक नियमित सेवा बहाल नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
फेरी ऑपरेटर ने जमा किए दस्तावेज
फेरी सेवा का ठेका लेने वाले संचालकों का कहना है कि उन्होंने नाव में जरूरी सीटों की व्यवस्था पूरी कर ली है और संबंधित अधिकारियों के पास आवश्यक दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं। उनका दावा है कि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।
हालांकि, मैरीटाइम कोड के तहत यात्रियों की सुरक्षा में कमी पाए जाने के कारण फेरी सेवा को रोकने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद सेवा को दोबारा शुरू करने के लिए सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी बताया गया है।
अधिकारियों की मंजूरी और निरीक्षण के बाद ही नियमित फेरी सेवा फिर से शुरू होने की संभावना है।
सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता
फेरी सेवा बंद होने और अस्थायी नाव सेवा जारी रहने के बीच स्थानीय लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बारिश और तेज हवा के मौसम में गहरे बैकवाटर्स को पार करना जोखिम भरा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों का सवाल है कि जब यात्रियों की सुरक्षा के कारण नियमित फेरी सेवा बंद की गई थी, तो अस्थायी नाव सेवा किस तरह अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले में स्पष्ट जानकारी दे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
कई लोगों का कहना है कि केवल सेवा जारी रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नाव की क्षमता, सुरक्षा उपकरण, यात्रियों की संख्या और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित
अरूर-कुम्बलंगी फेरी सेवा स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण परिवहन साधन है। हर दिन सैकड़ों लोग कुम्बलंगी से अरूर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में काम करने के लिए आते-जाते हैं।
कुम्बलंगी झील के पार अरूर पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों की कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क मार्ग से जाने में अधिक समय और दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कामगारों के समय और खर्च दोनों पर असर पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फेरी सेवा बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी दैनिक मजदूरों, कर्मचारियों और छात्रों को हो रही है, जिन्हें रोजाना इस मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है।
स्थायी समाधान की मांग
लोगों ने पंचायत और संबंधित विभागों से जल्द से जल्द नियमित फेरी सेवा बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि सेवा शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की जांच की जाए, लेकिन प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए।
फेरी संचालकों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार जरूरी बदलाव किए हैं और अब अनुमति का इंतजार है। वहीं, प्रशासन की ओर से सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बैकवाटर परिवहन का महत्व
केरल के तटीय इलाकों में फेरी सेवाएं केवल परिवहन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई द्वीपीय और जल क्षेत्र वाले इलाकों में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नावों पर निर्भर रहते हैं।
अरूर-कुम्बलंगी मार्ग भी इसी तरह का एक महत्वपूर्ण जल परिवहन मार्ग है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि सुरक्षा और सुविधा दोनों को ध्यान में रखते हुए जल्द स्थायी व्यवस्था की जाए।
फिलहाल अस्थायी मोटर नाव सेवा जारी है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और नियमित फेरी सेवा की बहाली को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब नजर प्रशासन के अगले फैसले पर है, जिससे इस मार्ग से जुड़े सैकड़ों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।





