केरल

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि चेरानल्लूर दुर्घटना की जांच में दखल दिया गया

Subhi
3 Nov 2026 7:07 AM IST
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि चेरानल्लूर दुर्घटना की जांच में दखल दिया गया
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कोच्चि: एर्नाकुलम की अतिरिक्त जिला अदालत ने सोमवार को उन अपीलों पर 'इन-कैमरा' (बंद कमरे में) सुनवाई करने का फैसला किया, जिनमें एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे की जमानत रद्द करने की मांग की गई है। यह लड़का चेरानल्लूर में हुए उस हादसे में कथित तौर पर शामिल था, जिसमें 25 अक्टूबर को 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की जान चली गई थी।

ये अपीलें राज्य सरकार और मृतक के बच्चों द्वारा दायर की गई थीं। उन्होंने किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत कानून के दायरे में आने वाले इस किशोर (CCL) को जमानत दी गई थी।

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने कहा कि चूंकि मामला एक किशोर से जुड़ा है, इसलिए इसकी कार्यवाही 'इन-कैमरा' (बंद कमरे में) की जा सकती है। जांच अधिकारी खुद अदालत में पेश हुए और केस डायरी प्रस्तुत की।

अदालत में उस समय एक अप्रत्याशित स्थिति देखने को मिली, जब अभियोजन पक्ष ने जयबालकृष्णन के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने परिवार पर जांच में दखल देने का आरोप लगाया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि बाहरी दखलंदाजी के कारण जांच एजेंसी स्वतंत्र और उचित तरीके से जांच नहीं कर सकी।

इन आरोपों को गंभीर मानते हुए, अदालत ने पूछा कि यह दखलंदाजी किस तरह की थी और क्या इसमें कोई धमकी या डराना-धमकाना शामिल था। अदालत ने मृतक के परिवार की ओर से पेश वकील से भी इस कथित रुकावट के बारे में सवाल किया। अदालत ने कहा, "हर किसी के अपने अधिकार हैं।" अदालत ने बताया कि जमानत मिलने से दुखी परिवार ने अपील करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया, जिसे अदालत ने स्वीकार भी कर लिया है। अदालत ने कहा, "इसी तरह, अभियोजन पक्ष के भी अपने अधिकार हैं।"


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