
Kerala केरल: तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।
Kerala में यह विवाद तब शुरू हुआ जब शनिवार को तिरुवनंतपुरम में RSS के शताब्दी समारोह के दौरान केरल यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी और मलयालम यूनिवर्सिटी के कुलपति कार्यक्रम में शामिल हुए।
RSS Centenary Celebrations के इस आयोजन में कुलपतियों की मौजूदगी को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं और इसे शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ा जा रहा है। वहीं सत्ताधारी और विपक्षी खेमों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व अध्यक्ष K. Surendran ने कुलपतियों के कार्यक्रम में शामिल होने का समर्थन किया है और मुख्यमंत्री V. D. Satheesan पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट कर इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व वाली UDF सरकार की आलोचना की।
अपने बयान में सुरेंद्रन ने दावा किया कि अभी तक केवल तीन कुलपति ही मोहन भागवत के भाषण में शामिल हुए हैं, लेकिन आने वाले समय में राज्य के अन्य कुलपति भी इसी तरह के कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
बीजेपी नेता ने अपने पोस्ट में RSS का बचाव करते हुए इसे “देश की जीवन शक्ति” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री को अनावश्यक विवाद पैदा करने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस और UDF के नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालयों के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों को राजनीतिक या वैचारिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
शिक्षा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञ भी इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं और कुलपतियों की भूमिका को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक कार्यक्रम में शामिल होने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि केरल की राजनीति में शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता और उनके प्रशासनिक आचरण को लेकर एक बड़ा विवाद बन गया है।





