केरल

पिनाराई विजयन ने रेवंत रेड्डी पर HYDRAA-हिटलर बयान को लेकर किया हमला

Kavita2
8 Jun 2026 1:54 PM IST
पिनाराई विजयन ने रेवंत रेड्डी पर HYDRAA-हिटलर बयान को लेकर किया हमला
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Kerala केरल: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सोमवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद HYDRAA से जुड़े एक बयान और उसमें हिटलर का संदर्भ दिए जाने के बाद सामने आया है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

पिनाराई विजयन ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान बेहद चौंकाने वाला और लोकतांत्रिक समाज का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक लोकतांत्रिक देश के मुख्यमंत्री द्वारा मंच से इस तरह की टिप्पणी करना गंभीर चिंता का विषय है।

विजयन ने अपने पोस्ट में लिखा कि रेवंत रेड्डी ने कहा कि HYDRAA शब्द हिटलर का पसंदीदा शब्द था और यह एक ऐसे सिस्टम की प्रेरणा है जो किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है। विजयन ने इस बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने आगे लिखा कि यह शर्म की बात है कि कांग्रेस पार्टी के पास ऐसा मुख्यमंत्री है जो उनके अनुसार दुनिया के सबसे बड़े फासीवादी की खुलेआम प्रशंसा कर रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

विजयन ने अपने पोस्ट में दोहराया कि इस तरह के बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत हैं और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदारी के साथ भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं को ऐसे उदाहरण नहीं देने चाहिए, जिससे समाज में गलत संदेश जाए।

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विभिन्न दलों के नेता इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे गंभीर मुद्दा मानकर जांच और स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से इस बयान पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि वह इस विवाद पर अपना पक्ष रख सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आगामी राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर सकता है, क्योंकि इसमें दो राज्यों के प्रमुख नेताओं के बीच सीधी टिप्पणी और आरोप शामिल हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर ऐतिहासिक संदर्भों और संवेदनशील शब्दों के उपयोग को लेकर नेताओं को अधिक सतर्क रहना चाहिए।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयान सामने आने की संभावना है।

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