
कलाथिल: ग्राम पंचायत का प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर (MCF) अब स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। करीब सात साल पहले कलाथिल मंदिर के पास पंचायत की अपनी जमीन पर शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट प्लास्टिक कचरे के बढ़ते ढेर के कारण अब लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
मटेरियल कलेक्शन फैसिलिटी (MCF) का उद्देश्य पंचायत क्षेत्र में जमा होने वाले प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना था। इसके तहत ‘हरिता कर्म सेना’ पंचायत के सभी 24 वार्डों से घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा एकत्र करती है। इसके बाद MCF केंद्र में लाए गए प्लास्टिक को अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर आगे भेजा जाता है।
हालांकि, समय के साथ केंद्र में प्लास्टिक कचरे का जमाव बढ़ता गया और अब यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
घरों से एकत्र किया जाता है प्लास्टिक
MCF परियोजना के तहत पंचायत क्षेत्र के सभी घरों से प्लास्टिक कचरा नियमित रूप से इकट्ठा किया जाता है। हरिता कर्म सेना के सदस्य घरों से प्लास्टिक लेकर केंद्र तक पहुंचाते हैं। इसके बाद वहां प्लास्टिक को अलग-अलग प्रकारों में बांटने का काम किया जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्लास्टिक को पुनर्चक्रण के लिए भेजना और खुले में कचरा फैलने से रोकना है। पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई इस पहल को शुरुआत में लोगों का अच्छा समर्थन भी मिला था।
22 सदस्य संभाल रहे हैं जिम्मेदारी
MCF में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन का काम हरिता कर्म सेना के 22 सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। ये सदस्य घरों से प्लास्टिक संग्रह करने के साथ-साथ केंद्र में आने वाले कचरे की छंटाई भी करते हैं।
कर्मियों की जिम्मेदारी है कि प्लास्टिक को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसे पुनर्चक्रण इकाइयों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जाए। लेकिन लगातार बढ़ती मात्रा और समय पर निपटान नहीं होने के कारण केंद्र में कचरे का दबाव बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों में बढ़ रही नाराजगी
कलाथिल मंदिर के पास स्थित MCF केंद्र के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि प्लास्टिक कचरे के ढेर के कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की शिकायत है कि लंबे समय तक जमा रहने वाले प्लास्टिक से दुर्गंध और अस्वच्छ माहौल पैदा हो रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह केंद्र बनाया गया था, वह अब पूरी तरह से पूरा नहीं हो पा रहा है। यदि समय पर प्लास्टिक को हटाने की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।
निपटान व्यवस्था पर उठे सवाल
MCF केंद्र में प्लास्टिक जमा होने का मुख्य कारण समय पर उसके निपटान की कमी को माना जा रहा है। घरों से लगातार प्लास्टिक पहुंच रहा है, लेकिन उसके अनुपात में बाहर भेजने की प्रक्रिया धीमी है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल प्लास्टिक संग्रह करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नियमित रूप से छंटाई, भंडारण और पुनर्चक्रण इकाइयों तक पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
पंचायत के सामने चुनौती
पंचायत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन प्रभावी तरीके से किया जाए और स्थानीय लोगों की परेशानी को दूर किया जाए। MCF जैसे केंद्र स्वच्छता अभियान के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके संचालन में लापरवाही या देरी से उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक कचरे को लंबे समय तक जमा रखने के बजाय समय-समय पर उसका परिवहन और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
समाधान की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत को इस समस्या के समाधान के लिए जल्द कदम उठाने चाहिए। उनका सुझाव है कि प्लास्टिक कचरे को नियमित अंतराल पर हटाने, केंद्र की सफाई व्यवस्था सुधारने और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
MCF परियोजना का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह केंद्र खुद कचरे के दबाव से जूझ रहा है। अब जरूरत है कि पंचायत और संबंधित विभाग मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करें जिससे प्लास्टिक प्रबंधन की यह पहल अपने मूल उद्देश्य को हासिल कर सके और स्थानीय लोगों को भी राहत मिल सके।





