
केरल : जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती परियोजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत करीब 3000 हेक्टेयर जमीन पर किसान प्राकृतिक और रासायनिक मुक्त खेती कर रहे हैं। परियोजना से जुड़े किसानों को न केवल जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें अपने उत्पादों को ऑनलाइन बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर टिकाऊ और लाभकारी कृषि मॉडल से जोड़ना है। ऑनलाइन बिक्री की सुविधा मिलने से किसान अपने उत्पादों की कीमत खुद तय कर सकते हैं और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ी है।
जैविक खेती परियोजना के तहत किसानों को खेती के ऐसे तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है, जिनमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का कम से कम उपयोग किया जाता है। इसके स्थान पर प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिले को ऑर्गेनिक जिला बनाने की दिशा में भी लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। ऑर्गेनिक खेती नीति को लागू करने के तहत वर्ष 2012 में जिले को जैविक जिला घोषित करने की योजना बनाई गई थी। इस पहल का मकसद जिले की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह जैविक मॉडल की ओर ले जाना था।
किसानों को संगठित रूप से जैविक खेती से जोड़ने के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत एक क्षेत्र के कई किसानों को समूह के रूप में जोड़कर उन्हें जैविक खेती की तकनीक, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है।
‘भारतीय प्रकृति कृषि योजना’ की शुरुआत वर्ष 2020-21 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (PGS) के तहत क्लस्टर आधारित जैविक खेती को बढ़ावा देना है। योजना के माध्यम से किसानों को जैविक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और उन्हें प्रमाणन प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है।
योजना के नियमों के अनुसार, जो किसान PGS इंडिया वेब पोर्टल पर पंजीकरण कराते हैं और परियोजना के निर्धारित मानकों के अनुसार खेती करते हैं, उन्हें तीन साल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद PGS ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन दिया जाता है।
जैविक प्रमाणन मिलने के बाद किसानों के उत्पादों की बाजार में पहचान बढ़ती है। उपभोक्ता प्रमाणित जैविक उत्पादों को अधिक भरोसे के साथ खरीदते हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकता है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री की सुविधा इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए किसान अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे उन्हें बाजार की जानकारी मिलती है और वे मांग के अनुसार अपने उत्पादन की योजना भी बना सकते हैं।
किसानों का मानना है कि ऑनलाइन बिक्री और जैविक प्रमाणन जैसी सुविधाएं मिलने से खेती अधिक लाभकारी बन सकती है। पहले जहां किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब डिजिटल माध्यमों से उन्हें नए बाजारों तक पहुंच मिल रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खेती मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, जैविक खेती में शुरुआती समय में अधिक मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है, लेकिन लंबे समय में इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
प्रशासन की ओर से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और जैविक खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ें और जिले की पहचान जैविक कृषि क्षेत्र के रूप में मजबूत हो।
3000 हेक्टेयर क्षेत्र में चल रही यह परियोजना जिले के कृषि क्षेत्र में बदलाव का संकेत मानी जा रही है। जैविक खेती, डिजिटल बाजार और प्रमाणन व्यवस्था के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले समय में जिले के और अधिक किसान जैविक खेती को अपनाकर बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां किसान टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ना चाहते हैं।





