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तिरुवनंतपुरम: विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने गृह मंत्री रमेश चेन्निथला द्वारा लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों के साथ बुलाई गई बैठक की आलोचना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक कदम बताया। यह बैठक अभियोजन महानिदेशक आसफ अली, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, कानून सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई. एक बयान में, पिनाराई ने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार का एक स्वतंत्र न्यायिक संस्थान को कार्यपालिका के नियंत्रण में लाने का कदम गलत था और यह संविधान का गंभीर उल्लंघन है।
विपक्षी नेता ने कहा कि इस कदम ने भारतीय संविधान और केरल लोकायुक्त अधिनियम, 1999 की भावना को पूरी तरह से कमजोर कर दिया है। पिनाराई ने कहा कि एक मंत्री द्वारा लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों को बुलाना कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच अलगाव के बुनियादी संवैधानिक सिद्धांत और एक स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली की गरिमा के विपरीत है।
केरल लोकायुक्त अधिनियम के तहत, लोकायुक्त एक स्वतंत्र संस्था है जो मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और सरकारी अधिकारियों सहित लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों की जांच करने के लिए अधिकृत है। पिनाराई ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री, जो स्वयं लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, के लिए लोकायुक्त और उप-लोकायुक्तों को बुलाना और उन्हें निर्देश जारी करना अवैध था।
विपक्षी नेता ने कहा कि जिन न्यायाधीशों को सरकारी प्रतिनिधियों और अभियोजन महानिदेशक की उपस्थिति में बिना किसी डर, पक्षपात या पूर्वाग्रह के काम करना होता है, उन्हें तलब करना जनता के बीच संस्था की निष्पक्षता के बारे में संदेह पैदा कर सकता है।
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