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तिरुवनंतपुरम। वरिष्ठ भाजपा नेता और सिक्किम के पूर्व राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन, विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन, राज्य सरकार के मंत्री, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने नए राज्यपाल का स्वागत किया।
लोक भवन में आयोजित हुआ शपथ ग्रहण समारोह
ओम प्रकाश माथुर का शपथ ग्रहण समारोह तिरुवनंतपुरम के लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्य के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही।केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन ने माथुर को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ उपस्थित रहे।माथुर के राज्यपाल बनने के साथ केरल में संवैधानिक पद पर नए कार्यकाल की शुरुआत हो गई है।
सनी जोसेफ ने किया नए राज्यपाल का स्वागत
केरल के मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने शपथ ग्रहण समारोह को खुशी का अवसर बताया।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि समारोह बेहद सुखद वातावरण में संपन्न हुआ। इसमें मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मंत्री और विधायक सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।जोसेफ ने कहा कि केरल को 'ईश्वर का अपना देश' कहा जाता है और ऐसे खूबसूरत राज्य में नए राज्यपाल का स्वागत करना खुशी की बात है।उन्होंने बताया कि राज्य के नेताओं ने नए राज्यपाल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ मिलकर राज्य के विकास की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई।
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की जगह ली
ओम प्रकाश माथुर ने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का स्थान लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को विभिन्न राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति और स्थानांतरण से संबंधित आदेश जारी किया था।इसके तहत सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया था।वहीं, केरल के तत्कालीन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया। इसके अलावा दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राजस्थान से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
ओम प्रकाश माथुर का जन्म 2 जनवरी 1952 को राजस्थान के पाली जिले के बेड़ल गांव में हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।माथुर ने वर्ष 1972 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।इसके बाद उन्होंने संगठनात्मक और राजनीतिक क्षेत्र में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।राजस्थान भाजपा के संगठन में भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया। वर्ष 2008 में उन्हें राजस्थान भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं माथुर
ओम प्रकाश माथुर को संसदीय राजनीति का भी लंबा अनुभव है। वह राजस्थान से दो बार राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए।उन्होंने वर्ष 2008 से 2014 और 2016 से 2022 तक संसद के उच्च सदन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया।इसके अलावा उन्होंने गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में भाजपा की संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं।राजनीति और प्रशासन के क्षेत्र में लंबे अनुभव के बाद उन्हें पहले सिक्किम और अब केरल के राज्यपाल की जिम्मेदारी मिली है।
मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट पर किया था स्वागत
ओम प्रकाश माथुर गुरुवार, 22 अक्टूबर को तिरुवनंतपुरम पहुंचे थे। उनके आगमन पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर स्वागत समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए नए राज्यपाल को शुभकामनाएं दी थीं।एयरपोर्ट से माथुर लोक भवन पहुंचे, जहां अगले दिन उनके शपथ ग्रहण की तैयारियां की गई थीं।
राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारियां
केरल के राज्यपाल के रूप में ओम प्रकाश माथुर अब राज्य के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे।भारतीय संविधान के अनुसार, राज्यपाल की भूमिका राज्य की संवैधानिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण होती है। विधानसभा से पारित विधेयकों पर निर्णय, संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन और सरकार के साथ आवश्यक प्रशासनिक समन्वय इस पद से जुड़े प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।माथुर की नियुक्ति के साथ केरल में राज्यपाल पद पर नया कार्यकाल शुरू हुआ है। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनका स्वागत करते हुए राज्य के विकास और संवैधानिक जिम्मेदारियों के सफल निर्वहन की उम्मीद जताई है।
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