
कोझिकोड: मैकेनिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर शैजा अंदावन को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कालीकट (NITC) में योजना एवं विकास की डीन नियुक्त किए जाने पर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर की गई एक पुरानी टिप्पणी से उपजा है, जिसमें शैजा ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रशंसा करते हुए उन्हें "भारत का गौरव" बताया था। शैजा को डीन नियुक्त करने का आधिकारिक आदेश सोमवार को NIT-C रजिस्ट्रार ने जारी किया। इस नियुक्ति की कई संकाय सदस्यों, छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों ने आलोचना की है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता मानदंडों का पालन नहीं किया गया। हालांकि, NITC अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि शैजा को दो साल के कार्यकाल के लिए इस पद पर नियुक्त करने में NIT अधिनियम के नियमों का पालन किया गया है। शैजा को लेकर विवाद 20 जनवरी, 2024 से शुरू हुआ, जब उन्होंने अधिवक्ता कृष्णराज द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट के तहत "भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है" टिप्पणी की थी। पोस्ट में गोडसे की तस्वीर और कैप्शन था, “नाथूराम विनायक गोडसे भारत में कई लोगों के लिए हीरो हैं।” बाद में व्यापक आक्रोश के बाद शैजा ने टिप्पणी हटा दी।
डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) समेत कई संगठनों ने शैजा की नियुक्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। बुधवार को डीवाईएफआई ने एनआईटीसी परिसर के सामने प्रदर्शन किया और उनकी नियुक्ति को तत्काल वापस लेने की मांग की। एक बयान में डीवाईएफआई के राज्य सचिवालय ने कहा कि जो व्यक्ति खुलेआम गांधी के हत्यारे का महिमामंडन करता है, वह एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान में वरिष्ठ प्रशासनिक पद पर रहने के लिए अयोग्य है।





