
तिरुवनंतपुरम: एक नई स्टडी से पता चला है कि कोच्चि में फ़ूड डिलीवरी राइडर्स में सबसे बड़ा हिस्सा ग्रेजुएट्स का है, और इनमें से लगभग आधे लोग अपने परिवार के लिए कमाने वाले मुख्य सदस्य हैं।
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट स्टडीज़ की रिसर्च स्कॉलर उन्निमाया यू.जी. की स्टडी 'इंट्रा स्टेट माइग्रेशन एंड लेबर मार्केट एंट्री इन द प्लेटफ़ॉर्म इकोनॉमी: एविडेंस फ़्रॉम फ़ूड डिलीवरी वर्कर्स इन कोच्चि, केरल' के अनुसार, कोच्चि के लगभग 60% फ़ूड डिलीवरी राइडर्स के पास डिग्री या उससे ज़्यादा की क्वालिफ़िकेशन है, और लगभग 90% ने कम से कम हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की है।
उन्निमाया की PhD थीसिस का हिस्सा रही इस स्टडी में सितंबर 2023 और फ़रवरी 2024 के बीच कोच्चि के प्रमुख डिलीवरी हॉटस्पॉट्स पर 271 डिलीवरी वर्कर्स का सर्वे किया गया। इसे गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) के जर्नल 'केरल इकोनॉमी' में पब्लिश किया गया था।
नतीजों से पता चला कि सर्वे में शामिल दो-तिहाई (66.4%) वर्कर्स के लिए 'गिग वर्क' (अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट-आधारित काम) ही कमाई का एकमात्र ज़रिया था। 47.6% वर्कर्स अपने घर में कमाने वाले मुख्य सदस्य थे। कमाई की बात करें तो, आधे से ज़्यादा (52.4%) लोग डिलीवरी से महीने में ₹20,000 से ज़्यादा कमाते थे और 27% लोग ₹25,000 से ज़्यादा कमाते थे। बाकी लोग ₹20,000 तक कमाते थे।
ये आंकड़े केरल में पढ़े-लिखे नौकरी चाहने वालों की बड़ी संख्या के संदर्भ में सामने आए हैं। स्टेट प्लानिंग बोर्ड की 'इकोनॉमिक रिव्यू 2025' के अनुसार, राज्य के एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में 22.98 लाख नौकरी चाहने वालों में से 4.05 लाख अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री होल्डर्स रजिस्टर्ड थे।





