
तिरुवनंतपुरम: मुट्टिल में पेड़ काटने के मामले में पूर्व मुख्य सचिव डॉ. ए. जयतिलक के खिलाफ विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच हो सकती है। गृह विभाग इस जांच की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी को सौंप सकता है।
अक्टूबर 2020 में राजस्व सचिव रहे जयतिलक ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें किसानों को केरल भूमि आवंटन नियमों के तहत उन्हें आवंटित जमीन पर पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि इस आदेश का गलत इस्तेमाल करके मुट्टिल इलाके में कई कीमती पेड़ काटे गए।
आरोप है कि जयतिलक ने राजस्व और वन विभागों के अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद यह आदेश जारी किया था। खबरों के अनुसार, आदेश जारी करने से पहले कानून और वन विभागों की राय भी नहीं ली गई थी।
हाई कोर्ट ने राजस्व विभाग के इस कदम के खिलाफ एक अंतरिम आदेश पारित किया था, लेकिन बताया जाता है कि कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।
इस आदेश में किसानों को उन पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई थी जिन्हें उन्होंने खुद लगाया था, जो जमीन पर प्राकृतिक रूप से उगे थे, और वे पेड़ जो जमीन आवंटित होने के समय से ही वहां मौजूद थे। तब तक, सरकार के पास कीमती 'अनुसूचित पेड़ों' का पूरा मालिकाना हक था। हालांकि, नए आदेश के तहत किसानों को चंदन को छोड़कर रोजवुड, सागौन और आबनूस जैसे पेड़ काटने की अनुमति मिल गई थी।
लगभग चार महीने बाद इस विवादित आदेश को रद्द कर दिया गया, जब अधिकारियों को पता चला कि लकड़ी तस्करों ने इस प्रावधान का फायदा उठाकर कीमती पेड़ों की तस्करी की थी। वन मंत्री ने आदेश के पीछे के मकसद पर सवाल उठाए थे और संकेत दिया था कि जयतिलक के इस कदम के पीछे कोई साजिश हो सकती है।





