
तिरुवनंतपुरम: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि लोकायुक्त को उनकी विवादित चार्टर्ड फ़्लाइट यात्रा के बारे में एक शिकायत मिली है, जिसमें उन्हें इस पद पर बने रहने के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री द्वारा 'अनुचित लाभ' उठाए जाने की जांच की मांग वाली याचिका पर 29 सितंबर को सुनवाई होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता के.एम. शाहजहाँ ने भ्रष्टाचार-रोधी संस्था से संपर्क किया और मुख्यमंत्री पर अपने पद का दुरुपयोग करके अनुचित लाभ लेने का आरोप लगाया। शिकायत में भ्रष्टाचार, आधिकारिक पद का दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि उन्होंने चिप्सन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड से आर्थिक लाभ लिया, जबकि उस समय कंपनी की सेवाओं को जारी रखने का प्रस्ताव सरकार के पास लंबित था।
अपनी शिकायत में, शाहजहाँ ने बताया कि राज्य सरकार का चिप्सन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ हेलीकॉप्टर सेवाएँ प्रदान करने का समझौता था, जिसके तहत सरकार 280 लाख रुपये का मासिक शुल्क दे रही थी। फर्म के साथ तीन साल का समझौता 19 सितंबर को समाप्त हो गया, जिसके बाद कंपनी ने 'पे-पर-यूज़' (इस्तेमाल के आधार पर भुगतान) के आधार पर हेलीकॉप्टर सेवाएँ प्रदान करने का एक नया प्रस्ताव पेश किया, जो सरकार के विचाराधीन है।
मुख्यमंत्री ने केलाचंद्र लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के विमान से मलप्पुरम की आधिकारिक यात्रा की, और इसकी व्यवस्था चिप्सन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से की गई थी। बाद में पता चला कि यात्रा का 19.88 लाख रुपये का बिल चिप्सन ने चुकाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के खजाने से कोई खर्च नहीं किया गया।
यह खुलासा कि खर्च चिप्सन एविएशन ने उठाया था, बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी का एक बड़ा व्यावसायिक प्रस्ताव सरकार के पास लंबित था। शिकायत में कहा गया है, "मुख्यमंत्री की आधिकारिक यात्रा के लिए एक प्राइवेट कमर्शियल कंपनी द्वारा लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान, संबंधित व्यक्ति और/या राज्य के लिए एक बड़ा आर्थिक लाभ है। इसकी कानूनी वैधता और औचित्य की जांच होनी चाहिए, खासकर तब जब मदद करने वाली कंपनी का सरकार से अपने पक्ष में फैसला पाने का सीधा कमर्शियल हित हो।" शिकायत में यह भी बताया गया कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(a) लागू होगी।





