
Kerala केरल: मुल्लापेरियार बांध तक पहुंच के लिए थेक्कडी झील में एक नई फाइबर नाव को शामिल किया है। यह नाव शनिवार रात कोच्चि से एक लॉरी के जरिए थेक्कडी लाई गई थी, जिसे रविवार सुबह दो क्रेन की मदद से झील में सफलतापूर्वक उतारा गया। इस नई नाव के जुड़ने से मुल्लापेरियार क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के पास मुल्लापेरियार बांध तक जाने के लिए पहले से ही दो नावें मौजूद हैं। नई नाव को 1982 में झील में उतारी गई 21 यात्रियों की क्षमता वाली ‘कन्नकी’ नाव के स्थान पर लाया गया है। नई कन्नकी नाव में पहले इस्तेमाल हो रहे 27 हॉर्सपावर इंजन के मुकाबले 47 हॉर्सपावर का अधिक शक्तिशाली इंजन लगाया गया है, जिससे इसकी संचालन क्षमता और गति में सुधार होगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नई नाव को तुरंत संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। झील में मौजूद पुरानी दो नावों को पहले हटाना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही नई नाव को नियमित रूप से चलाने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इससे पहले भी झील में पुराने जहाजों को बदलने की प्रक्रिया के तहत ‘जलरत्न’ नामक नाव को हटाकर ‘तमिल अन्नाई’ नामक फाइबर नाव को शामिल किया गया था। हालांकि उस दौरान भी नई नाव के संचालन को लेकर कई प्रशासनिक और तकनीकी विवाद सामने आए थे।
सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार ने मुल्लापेरियार हाई अथॉरिटी कमेटी के समक्ष यह मांग भी रखी थी कि नई नाव को पुरानी नावों को हटाए बिना ही चलाने की अनुमति दी जाए, जिससे इस मुद्दे पर कुछ समय तक असहमति की स्थिति बनी रही। बाद में प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के बाद स्थिति को सुलझाया गया।
लंबे समय तक इंतजार के बाद ‘तमिल अन्नाई’ नाव का संचालन शुरू किया गया था, जिसके बाद अब नई नाव के शामिल होने से एक बार फिर व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नई नाव का पोर्ट विभाग द्वारा ट्रायल रन और तकनीकी निरीक्षण पूरा किए जाने के बाद ही इसे बांध क्षेत्र में आधिकारिक रूप से तैनात किया जाएगा।
फिलहाल नई नाव झील में परीक्षण चरण में है और सभी सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों और अधिकारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए सभी प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना संचालन शुरू नहीं किया जाएगा।
मुल्लापेरियार बांध क्षेत्र में नावों का संचालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह क्षेत्रीय आवाजाही और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संपर्क व्यवस्था प्रदान करता है। ऐसे में नई नाव के शामिल होने से सुविधा और क्षमता दोनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुरानी नावों के हटने और परीक्षण पूरा होने के बाद नई फाइबर नाव कब से नियमित सेवा में शामिल होगी।





