केरल

बुजुर्गों की देखभाल और अधिकारों के लिए नया विधेयक, केरलम में केयर सेंटरों के पंजीकरण का प्रस्ताव

nidhi
14 Oct 2026 9:56 AM IST
बुजुर्गों की देखभाल और अधिकारों के लिए नया विधेयक, केरलम में केयर सेंटरों के पंजीकरण का प्रस्ताव
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सतीशन सरकार के विधेयक में सुरक्षा और सम्मान पर जोर
तिरुवनंतपुरम: केरलम में बढ़ती बुजुर्ग आबादी की देखभाल और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में ‘केरलम सीनियर सिटीजन्स—देखभाल और अधिकारों का संरक्षण विधेयक, 2026’ पेश किया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को प्रस्तुत विधेयक आगे की समीक्षा के लिए विधानसभा की विषय समिति को भेज दिया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 2036 तक राज्य में बुजुर्गों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से दोगुना होने का अनुमान है। यह अनुमान 2026 के लिए नहीं है। उन्होंने बदलती जनसंख्या संरचना को राज्य की योजनाओं में प्रमुख स्थान देने की जरूरत बताई।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बुजुर्गों को उपेक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण से बचाना तथा देखभाल संस्थानों की जवाबदेही तय करना है। इसमें परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, कानूनी उत्तराधिकारी, देखभाल केंद्र के प्रभारी, कर्मचारी या केयरगिवर की ओर से शारीरिक अथवा मानसिक प्रताड़ना और क्रूरता पर तीन साल तक कारावास तथा 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने बुजुर्गों की संपत्ति पर कब्जा करने और उन्हें छोड़ देने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए। ये प्रावधान अभी विधेयक का हिस्सा हैं; इसे लागू कानून मानना सही नहीं होगा।
विधेयक में बुजुर्गों को जहां तक संभव हो, अपने घर और परिचित समुदाय में रहने के लिए सहायता देने पर जोर है। परिवार और कानूनी उत्तराधिकारियों से आवश्यक देखभाल की अपेक्षा की गई है। संस्थागत देखभाल को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है। देखभाल की परिभाषा भोजन, कपड़े, आवास और इलाज तक सीमित नहीं रखी गई है। इसमें सामाजिक संपर्क, मनोरंजन तथा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भागीदारी भी शामिल है। सार्वजनिक स्थानों पर रैंप, प्राथमिकता वाली सीटें और कतारें तथा सुगम शौचालय जैसे उपाय भी प्रस्तावित हैं।
बुजुर्गों की सेवा देने वाले केयर होम, डे-केयर सेंटर, अस्थायी राहत केंद्र, हॉस्पिस, होम-केयर एजेंसियों और देखभाल प्रशिक्षण केंद्रों के पंजीकरण की व्यवस्था प्रस्तावित है। पंजीकरण प्रमाणपत्र चार साल के लिए मान्य होंगे और उनका नवीनीकरण करना होगा। अधिकारियों को संस्थानों का निरीक्षण करने, शिकायतों की जांच और निर्धारित शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई का अधिकार देने का प्रस्ताव है। राज्य स्तर पर वरिष्ठ नागरिक संरक्षण इकाई तथा जिला स्तर पर संरक्षण मंच और इकाइयां भी गठित की जाएंगी। इनका काम उपेक्षा, प्रताड़ना और शोषण की शिकायतों पर ध्यान देना होगा।
स्वास्थ्यकर्मियों और देखभाल केंद्रों की जिम्मेदारी भी तय करने की तैयारी है। पंजीकृत चिकित्सकों तथा वरिष्ठ नागरिक देखभाल केंद्रों को बुजुर्ग की जांच के दौरान दुर्व्यवहार, उपेक्षा या शोषण की जानकारी मिलने पर 48 घंटे के भीतर जिला संरक्षण इकाई को साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट देनी होगी। विधेयक में सस्ती घरेलू देखभाल, मुफ्त कानूनी सहायता, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच के प्रावधान हैं। बुजुर्ग महिलाओं को आश्रय और देखभाल केंद्रों में प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है।
सरकार बुजुर्गों के अनुभव का आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने के लिए ‘सिल्वर इकोनॉमी’ विकसित करना चाहती है। साठ वर्ष से अधिक उम्र के अनुभवी पेशेवर युवा उद्यमियों को तकनीकी, विपणन और प्रबंधन संबंधी मार्गदर्शन दे सकेंगे। इसके लिए मानदेय देने की व्यवस्था पर विचार है। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी विशेषज्ञता कुदुम्बश्री इकाइयों की परियोजनाएं तैयार करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी उपयोगी हो सकती है। अकेले रहने वाले, बिस्तर पर निर्भर और विशेष देखभाल की जरूरत वाले बुजुर्गों की जानकारी जुटाने की योजना भी है।
विधेयक में चश्मे, श्रवण यंत्र और चलने-फिरने में मदद करने वाले उपकरण उचित कीमत पर उपलब्ध कराने का अधिकार भी शामिल है। बुजुर्गों की स्वैच्छिक संपत्ति दान प्रक्रिया में जिला संरक्षण इकाई की जांच और जिलाधिकारी की मौजूदगी में समझौते की व्यवस्था प्रस्तावित है। उपचार संबंधी इच्छाएं दर्ज करने वाली ‘लिविंग विल’ के लिए भी प्रक्रिया रखी गई है। देखभाल करने वालों के लिए एक समान प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विकसित किया जाएगा।
बिना पंजीकरण देखभाल केंद्र चलाने पर एक साल तक कारावास, 25 हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रस्ताव है। कानून के क्रियान्वयन में बाधा डालने और आवश्यक रिपोर्ट नहीं देने के लिए भी दंड रखे गए हैं। वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए सरकारी अनुदान, स्थानीय निकायों, सीएसआर और दान से एक विशेष कोष बनाने का प्रावधान है। अब विषय समिति विधेयक की समीक्षा करेगी।
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