केरल

नेडुम्बसेरी हादसा: 240 किमी/घंटे की रफ्तार पर हाई कोर्ट सख्त

Tara Tandi
16 Oct 2026 11:08 AM IST
नेडुम्बसेरी हादसा: 240 किमी/घंटे की रफ्तार पर हाई कोर्ट सख्त
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कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने पूछा है कि राज्य में तेज रफ्तार वाहनों का पता लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए क्या व्यवस्था है। अदालत ने एक प्रभावी प्रणाली की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने सवाल किया कि नेडुम्बसेरी में हुए उस हादसे को क्या रोका जा सकता था, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई? यह हादसा तब हुआ जब एक युवक कथित तौर पर 240 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था। क्या अधिकारियों ने पहले ही उसकी तेज रफ्तार को पकड़ लिया होता और कार्रवाई की होती, तो यह हादसा टल सकता था?
यह सवाल सड़क सुरक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस वी. राजा विजयराघवन और जस्टिस के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने उठाया। अदालत ने पूछा कि क्या राष्ट्रीय राजमार्गों पर रात में दिखने वाले ऐसे कोई साइनबोर्ड लगे हैं, जो वाहन चालकों को 80 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार न रखने की चेतावनी देते हों? अदालत ने गौर किया कि युवा आधी रात के बाद कोच्चि और शहर के अन्य हिस्सों की सड़कों पर सुपरकारें लेकर निकलते हैं। ऐसी कारें कुछ ही सेकंड में 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इतनी तेज रफ्तार से चल रही कार में ब्रेक लगाने पर भी वह आगे बढ़ती रहती है।
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मामलों का विवरण दें, जिनमें तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने का पता चला हो और रिपोर्ट दर्ज की गई हो। अदालत ने परिवहन आयुक्त को ऑनलाइन पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया कि इसके लिए क्या उपाय किए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि 23 साल से कम उम्र के लोगों को शराब परोसने पर रोक लगाने वाले कानून का पालन नहीं हो रहा है।
अदालत ने कहा कि सड़क हादसे का दर्द तभी समझ आता है जब कोई अपने किसी करीबी को खो देता है। इसमें सबसे ज्यादा मौतें बच्चों और महिलाओं की होती हैं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क किनारे लगे ट्रांसफॉर्मरों को वहां से हटाया जाए। साथ ही, यह भी कहा कि बसों को तय दिशा के विपरीत चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और राजमार्गों पर वाहनों को पार्क करने से रोका जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि तेज रफ्तार पर काबू पाने के लिए कई आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने जोर देकर कहा कि सिर्फ कैमरे लगाना काफी नहीं है, बल्कि नियमों को सख्ती से लागू करना जरूरी है। अदालत ने यह भी बताया कि 'सड़क सुरक्षा कोष' (Road Safety Fund) में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है।
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