केरल

CMRL विवाद पर एमवी गोविंदन बोले कानूनी और राजनीतिक दोनों लड़ाई लड़ेंगे

Ratna Netam
23 Sept 2026 9:49 PM IST
CMRL विवाद पर एमवी गोविंदन बोले कानूनी और राजनीतिक दोनों लड़ाई लड़ेंगे
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तिरुवनंतपुरम। केरल में Exalogic-CMRL वित्तीय लेनदेन से जुड़ा मामला एक बार फिर राजनीतिक टकराव के केंद्र में आ गया है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के केरल राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने बुधवार को आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन को निशाना बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की जांच का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने मामले में विजयन की बेटी टी. वीना और उनकी कंपनी Exalogic Solutions का बचाव करते हुए जांच से जुड़े आरोपों को निराधार बताया।गोविंदन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि CPI(M) शुरू से इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और केरल की कांग्रेस सरकार के राजनीतिक हित इस मुद्दे पर एक जैसे हैं। गोविंदन ने कहा कि पार्टी जांच से पीछे नहीं हटेगी और मामले का कानूनी तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर सामना करेगी। यह CPI(M) और गोविंदन का आरोप है; केंद्र सरकार, ED और केरल सरकार की कार्रवाई को जांच एजेंसियों द्वारा अलग आधार पर उचित ठहराया गया है।
₹1.7 करोड़ के भुगतान पर विवाद
इस पूरे मामले के केंद्र में Exalogic Solutions और Cochin Minerals and Rutile Limited यानी CMRL के बीच वित्तीय लेनदेन है। आयकर विभाग की जांच के बाद सामने आए मामले में आरोप लगाया गया था कि 2017-18 और 2018-19 के दौरान Exalogic को CMRL से करीब ₹1.72 करोड़ मिले। समझौतों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, मैनेजमेंट और कंसल्टेंसी जैसी सेवाओं का उल्लेख था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन भुगतानों के बदले संबंधित सेवाएं दिए जाने का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं मिला।CPI(M) इस आरोप को खारिज करती रही है। गोविंदन ने कहा कि CMRL और वीना विजयन की कंपनी के बीच समझौता वैध था और भुगतान के बदले सेवाएं दी गई थीं। पिनाराई विजयन ने भी पहले कहा था कि उनकी बेटी को सेवाओं के बदले भुगतान मिला, लेनदेन बैंक खाते के माध्यम से हुआ और संबंधित करों का भुगतान किया गया।इसलिए मामले में दो अलग दावे सामने हैं। जांच एजेंसियां भुगतान और उसके बदले कथित सेवाओं की वास्तविकता की जांच कर रही हैं, जबकि वीना विजयन और CPI(M) का पक्ष है कि कारोबारी समझौता और भुगतान वैध थे। अब तक इस मामले में पिनाराई विजयन, वीना विजयन, Exalogic या CMRL को किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है।
केरल सरकार ने भी जांच का दिया आदेश
विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब ED ने केरल पुलिस को एक रिपोर्ट भेजकर पिनाराई विजयन, वीना विजयन और पूर्व मंत्री पीए मोहम्मद रियास से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की सिफारिश की। इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने प्रारंभिक जांच कराने का फैसला किया है।राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के मुताबिक एडवोकेट जनरल की कानूनी राय लेने के बाद जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम मामले की प्रारंभिक जांच करेगी। इस स्तर पर जांच का उद्देश्य उपलब्ध सामग्री और आरोपों की सत्यता की पड़ताल करना है।ED की रिपोर्ट में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय लेनदेन को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। वहीं CPI(M) का कहना है कि इन आरोपों के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं और पार्टी इन्हें अदालत तथा सार्वजनिक मंच दोनों पर चुनौती देगी।
जांच एजेंसियों के दावों को CPI(M) ने नकारा
गोविंदन ने कहा कि मामले में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे CPI(M) या पिनाराई विजयन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप साबित हों। उन्होंने जांच को कथित तौर पर गढ़ी गई कहानी बताया और कहा कि राजनीतिक हमलों से पार्टी को कमजोर नहीं किया जा सकता।दूसरी ओर ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि Exalogic को किए गए कुछ भुगतान वास्तविक सेवाओं के बजाय कथित अवैध भुगतान का हिस्सा थे। *इंडियन एक्सप्रेस* के मुताबिक आयकर विभाग के Interim Board for Settlement ने पहले संबंधित लेनदेन को लेकर प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज किए थे।मामले में कंपनी मामलों के मंत्रालय की जांच भी हो चुकी है। जून 2026 में सामने आई जांच संबंधी रिपोर्टिंग के मुताबिक अधिकारियों ने Exalogic और CMRL के बीच समझौतों के तहत कथित सेवाओं के दस्तावेजी प्रमाणों को लेकर सवाल उठाए थे।
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
Exalogic-CMRL विवाद पहले ही अदालत तक पहुंच चुका है। जून में केरल हाईकोर्ट ने ED की जांच को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि किसी अनुसूचित अपराध की FIR दर्ज नहीं होना अपने आप में ED को PMLA के तहत प्रारंभिक जांच या पूछताछ करने से नहीं रोकता। हालांकि अदालत ने जांच करने की शक्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अभियोजन की आवश्यकताओं के बीच अंतर भी स्पष्ट किया था।इस फैसले का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं था, बल्कि यह ED की जांच संबंधी कानूनी शक्तियों से जुड़ा निर्णय था।
गवाहों के बयान पर भी नया विवाद
मामले में हाल में एक और पहलू सामने आया है। CMRL के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने ED को पहले दिए गए अपने बयानों को वापस लेने की कोशिश करते हुए आरोप लगाया कि उनसे दबाव में बयान लिए गए थे। ED की रिपोर्ट में इन अधिकारियों के शुरुआती बयानों का इस्तेमाल कथित भुगतान से जुड़े आरोपों के समर्थन में किया गया था।बयान वापस लेने और दबाव के आरोपों की सत्यता भी जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है। इससे मामले में साक्ष्यों की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस शुरू हुई है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों पर निशाना
गोविंदन ने इस विवाद में केंद्र की भाजपा सरकार के साथ केरल की कांग्रेस सरकार पर भी हमला किया। उनका कहना है कि दोनों राजनीतिक पक्ष CPI(M) और पिनाराई विजयन को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी आने वाले दिनों में राजनीतिक स्तर पर भी इसका मुकाबला करेगी।दूसरी तरफ केरल सरकार का कहना है कि ED से प्राप्त जानकारी और एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के आधार पर प्रारंभिक जांच का फैसला लिया गया है। ऐसे में जांच के राजनीतिक उद्देश्य को लेकर CPI(M) के आरोप और राज्य सरकार का कानूनी प्रक्रिया वाला पक्ष आमने-सामने हैं।
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