केरल

मासिक भुगतान मामला: पिनाराई विजयन मुख्य आरोपी, 2 FIR दर्ज

Tara Tandi
12 Oct 2026 1:11 PM IST
मासिक भुगतान मामला: पिनाराई विजयन मुख्य आरोपी, 2 FIR दर्ज
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तिरुवनंतपुरम: विजिलेंस विभाग ने CMRL और Exalogic के बीच हुए फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक पत्र के आधार पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना और उनके पति, पूर्व मंत्री पी ए मोहम्मद रियास के खिलाफ FIR दर्ज की है। दो मामले दर्ज किए गए हैं। पहला मामला CMRL और Exalogic के बीच फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन से जुड़ा है, जिसमें पिनाराई विजयन पहले आरोपी हैं और वीना दूसरी आरोपी हैं। दूसरा मामला इस आरोप से जुड़ा है कि जब रियास मंत्री थे, तब भ्रष्टाचार का पैसा विदेश भेजा गया था। इस मामले में रियास पहले आरोपी हैं और वीना दूसरी आरोपी हैं।
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज किया गया है। मामले की जांच के लिए आज एक विशेष टीम भी बनाई जाएगी। उम्मीद है कि पिनाराई विजयन आज अपील दायर करेंगे। वे अदालत को बताएंगे कि हाई कोर्ट ने उनकी दलीलें सुने बिना ही अपना आदेश जारी कर दिया था। हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा केरल राज्य पुलिस प्रमुख (DGP) को भेजे गए पत्र के आधार पर सीधे मामला दर्ज करने और जांच की मांग वाली याचिका पर विजिलेंस जांच का आदेश दिया था। जस्टिस ए बदरुद्दीन ने ED के पत्र में बताई गई जानकारी की जांच के लिए विशेष टीम बनाने के DGP के आदेश को भी रद्द कर दिया था।
अदालत ने तिरुवनंतपुरम में विजिलेंस डायरेक्टर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने पाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा सौंपे गए पत्र और दस्तावेजों में सीधे FIR दर्ज करने के लिए पर्याप्त तथ्य मौजूद थे। दस्तावेजों में गवाहों और संदिग्ध व्यक्तियों के बयान भी शामिल थे। ED द्वारा दी गई जानकारी से संकेत मिलता है कि आरोपियों ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत अपराध किए थे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिवीजन याचिका खारिज करने के बाद, जानकारी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत FIR दर्ज करने के लिए DGP को भेज दिया गया था। इसलिए, अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश प्रभावी जांच में बाधा नहीं बनेंगे। यह आदेश इस महीने की 9 तारीख को V S अच्युतानंदन के पूर्व अतिरिक्त निजी सचिव K M शाहजहाँ द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में जारी किया गया था।
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