
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) की कई परियोजनाओं में कथित विफलताओं को लेकर विधायक सुरेश कुमार ने सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि BDA, जिसका उद्देश्य बेंगलुरु में नए लेआउट विकसित करना और शहर का विस्तार करना है, BSK Phase VI, अर्कावती और नादप्रभु केम्पेगौड़ा लेआउट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में बुरी तरह असफल रहा है और इससे उसकी प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ा है।
सुरेश कुमार ने इस मामले में सोशल नेटवर्किंग साइट Facebook पर एक विस्तृत पत्र साझा किया। पत्र में उन्होंने बताया कि हाल ही में अखबारों में यह खबर पढ़ी कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने BDA के रेजिडेंशियल लेआउट, विशेषकर NPKL पर रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (#RERA) लागू करने के खिलाफ स्टे ऑर्डर जारी किया है। उन्होंने कहा कि यह खबर पढ़कर वे हैरान रह गए और इसे बेंगलुरु के विकास के लिए चिंता का विषय बताया।
सुरेश कुमार ने RERA एक्ट की मूल भावना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि RERA एक्ट इस सोच के साथ लागू किया गया था कि सभी स्टेकहोल्डर्स की बजाय कंज्यूमर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने हाई कोर्ट से अपील की कि इसे इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
विधायक ने आरोप लगाया कि BDA ने परियोजनाओं में तकनीकी और नियामकीय पहलुओं पर ध्यान देने में असफलता दिखाई है, जिससे आम जनता और निवेशकों में असंतोष फैल गया है। उन्होंने कहा कि BDA के लेआउट विकास की नाकामी ने निवेशकों और गृहस्वामियों के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं।
सुरेश कुमार के अनुसार, BSK Phase VI, अर्कावती और नादप्रभु केम्पेगौड़ा लेआउट जैसी परियोजनाओं में देरी और कम गुणवत्ता वाली कार्यप्रणाली के कारण लोगों का भरोसा टूट गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि BDA को केवल तकनीकी नियमों के पालन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय नागरिकों और निवेशकों के हितों की सुरक्षा करनी चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी बहस शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि BDA के कार्यों में सुधार की तत्काल आवश्यकता है ताकि बेंगलुरु शहर का विस्तार सुचारू रूप से हो सके और निवेशकों का भरोसा बढ़े।
सुरेश कुमार ने पत्र में यह भी कहा कि BDA को परियोजनाओं की निगरानी, समय पर कार्य पूरा करना और गुणवत्तापूर्ण लेआउट सुनिश्चित करने में अधिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर BDA ने सुधार नहीं किया, तो यह शहर के विकास के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
इस पूरे विवाद ने BDA के कामकाज और RERA एक्ट के लागू होने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कर्नाटक हाई कोर्ट और BDA इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और जनता की उम्मीदों के अनुसार सुधार की दिशा में कदम उठाते हैं।





