
श्रीनगर : कश्मीर घाटी में बढ़ती महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। मीट, चिकन और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। नागरिकों ने प्रशासन से बाजारों की निगरानी बढ़ाने और अधिक कीमत वसूलने वाले व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ समय से मांस और चिकन की कीमतों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। कई बाजारों में जिंदा मुर्गा 200 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि मटन की कीमत 750 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे आम परिवारों के लिए रोजमर्रा के खर्चों को संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि पहले ही सब्जियों और अन्य जरूरी सामान की कीमतें बढ़ी हुई हैं, ऐसे में मीट और चिकन के दाम बढ़ने से परेशानी और बढ़ गई है।
नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन बाजारों में नियमित जांच अभियान चलाए। उनका कहना है कि थोक और खुदरा स्तर पर कीमतों की निगरानी होनी चाहिए, ताकि ग्राहकों से मनमानी कीमत न वसूली जा सके।
हालांकि, स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि केवल खुदरा विक्रेताओं को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनका दावा है कि कीमतों में असली बढ़ोतरी थोक स्तर से शुरू होती है। दुकानदारों के अनुसार, उन्हें खुद महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ रहा है, जिसके बाद उन्हें बिक्री मूल्य तय करना पड़ता है।
स्थानीय दुकानदार मुदासिर सलफी ने बताया कि खुदरा विक्रेताओं पर अक्सर ज्यादा कीमत लेने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि थोक व्यापारी उन्हें जिंदा मुर्गा करीब 180 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद परिवहन, दुकान का खर्च और अन्य लागत जोड़ने के बाद खुदरा कीमत बढ़ जाती है।
दुकानदारों का कहना है कि अगर कीमतों को नियंत्रित करना है तो प्रशासन को सप्लाई चेन की पूरी प्रक्रिया की जांच करनी होगी। केवल दुकानों पर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि मौसम, परिवहन खर्च और बाजार की मांग जैसे कई कारणों से मीट और चिकन की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता रहता है। उनका कहना है कि घाटी में कई बार आपूर्ति प्रभावित होने से भी कीमतें बढ़ जाती हैं।
वहीं, उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में कीमतों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना है कि दुकानों पर निर्धारित रेट सूची लगाई जानी चाहिए, ताकि ग्राहकों को सही कीमत की जानकारी मिल सके।
कश्मीर में मीट और चिकन लोगों के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ता है। खासकर त्योहारों और विशेष अवसरों पर मांग बढ़ने से कीमतों में और तेजी आने की संभावना रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को नियमित बाजार निरीक्षण, आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और कालाबाजारी पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल घाटी के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में जल्द कदम उठाएगा और बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करेगा। बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता को राहत देने के लिए थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर निगरानी जरूरी मानी जा रही है।





