केरल

18 महीने की बीमार हथिनी माया को मिला नया सहारा, वंतारा में होगा इलाज

Ratna Netam
6 Nov 2026 8:03 PM IST
18 महीने की बीमार हथिनी माया को मिला नया सहारा, वंतारा में होगा इलाज
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कोच्चि। केरल के कोडानाड अभयारण्य में रह रही 18 महीने की बीमार हथिनी 'माया' को बेहतर इलाज की उम्मीद के साथ शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा (Vantara) पशु बचाव एवं पुनर्वास केंद्र पहुंचाया गया। माया को कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) की मदद से विशेष चार्टर्ड विमान के जरिए एयरलिफ्ट किया गया। जन्म से ही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही माया की हालत गंभीर बताई जा रही थी। उसकी बीमारी को देखते हुए पहले स्वास्थ्य निगरानी समिति ने इच्छामृत्यु की सिफारिश भी की थी। हालांकि, वंतारा की ओर से विशेष उपचार का प्रस्ताव मिलने के बाद उसे एक और मौका देने का निर्णय लिया गया।इस पूरे अभियान में केरल वन विभाग, CIAL, वंतारा की चिकित्सा टीम और पशु चिकित्सकों ने समन्वय से काम किया। माया को सुरक्षित विमान तक पहुंचाने के लिए कोचीन एयरपोर्ट के घरेलू कार्गो टर्मिनल पर विशेष इंतजाम किए गए थे। वंतारा ने माया के हवाई परिवहन और इलाज का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।
दोपहर 1:30 बजे कोच्चि से रवाना हुआ विमान
माया को कोडानाड हाथी केंद्र से विशेष पशु एम्बुलेंस के जरिए नेदुम्बस्सेरी स्थित कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाया गया। इसके बाद उसे विशेष रूप से तैयार किए गए चार्टर्ड विमान में स्थानांतरित किया गया। विमान ने शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे CIAL से जामनगर के लिए उड़ान भरी।माया के वजन और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसके स्थानांतरण के दौरान विशेष सावधानी बरती गई। उसे वाहन में चढ़ाने के लिए क्रेन और करीब 10 से 12 लोगों की सहायता ली गई। इसके बाद एयरपोर्ट तक पहुंचाने और विमान में सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग चरणों में व्यवस्था की गई।CIAL ने अपने घरेलू कार्गो टर्मिनल पर माया के पिंजरे को रखने और उसे विमान तक पहुंचाने के लिए विशेष स्थान और लॉजिस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं। एयरपोर्ट प्रशासन ने आवश्यक बुनियादी ढांचा, समन्वय और परिचालन सहायता भी प्रदान की।
जन्म के बाद से ही मुश्किलों से जूझ रही थी माया
माया की कहानी उसके जन्म के साथ ही शुरू हो गई थी। अप्रैल 2025 में केरल के मलयाटूर वन क्षेत्र में उसका जन्म हुआ था। जन्म के बाद हाथियों का झुंड नदी पार करके आगे बढ़ गया, लेकिन माया पीछे छूट गई। वन विभाग के अधिकारियों ने उसे अकेला और बेहद कमजोर हालत में पाया था। उसे तत्काल बचाकर अभयारण्यम लाया गया, जहां वन विभाग के कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों ने उसकी देखभाल शुरू की।माया को शुरुआत से ही कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। उसे मां का पहला दूध भी नहीं मिल पाया था। बाद में जांच में हड्डियों से जुड़ी जन्मजात समस्या और ओस्टियोपीनिया (Osteopenia) का पता चला। इस बीमारी में हड्डियां सामान्य से कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है।करीब 18 महीने की माया का वजन लगभग 125 से 130 किलोग्राम बताया गया है। कुछ समय पहले गिरने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। वह खुद खड़ी होने और चलने में असमर्थ हो गई। चिकित्सकीय जांच में कई फ्रैक्चर, हड्डियों में गंभीर कमजोरी, छाती में संक्रमण और लंबे समय तक एक ही स्थिति में पड़े रहने के कारण घाव होने की जानकारी सामने आई।
पहले हुई थी इच्छामृत्यु की सिफारिश
माया की लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए स्वास्थ्य निगरानी समिति ने पहले इच्छामृत्यु (Euthanasia) की सिफारिश की थी। चिकित्सकों के सामने चुनौती यह थी कि उसकी हड्डियों की स्थिति बेहद कमजोर थी और वह सामान्य तरीके से चलने-फिरने में सक्षम नहीं थी।हालांकि, केरल वन विभाग ने उसके इलाज के अन्य विकल्प तलाशने का फैसला किया। इसी दौरान वंतारा की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम से संपर्क किया गया। माया की मेडिकल रिपोर्ट, एक्स-रे और रक्त जांच की रिपोर्ट विशेषज्ञों के साथ साझा की गई।इसके बाद 1 नवंबर से विशेषज्ञों के बीच परामर्श शुरू हुआ और 4 नवंबर को मेडिकल बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। इसमें हाथियों के विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों ने माया की स्थिति का मूल्यांकन किया। विशेषज्ञों ने कुछ संभावित उपचार विकल्पों की पहचान करते हुए उसे वंतारा भेजने की सिफारिश की। इसके बाद केरल के मुख्य वन्यजीव वार्डन पी. पुगझेंदी ने 5 नवंबर को उसे गुजरात स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
हार्मोनल थेरेपी और हाइड्रोथेरेपी से होगा उपचार
जामनगर स्थित वंतारा में माया के लिए विशेष उपचार योजना तैयार की गई है। इसमें हार्मोनल थेरेपी और हाइड्रोथेरेपी को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का उद्देश्य उसकी हड्डियों की स्थिति में सुधार करना, दर्द कम करना और धीरे-धीरे उसे खड़े होने तथा चलने में सक्षम बनाना है।वंतारा में पहुंचने के बाद माया को चौबीसों घंटे पशु चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आगे की जांच और उपचार की रणनीति तय होगी। जरूरत पड़ने पर विशेष उपकरणों की सहायता से उसे सुरक्षित तरीके से उठाने, बैठाने और उसकी शारीरिक स्थिति बदलने की व्यवस्था भी की जाएगी।उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उपचार की शुरुआती अवधि करीब 60 दिन हो सकती है, जबकि केरल वन विभाग ने पूरी रिकवरी की अवधि लगभग चार से छह महीने तक रहने की संभावना जताई है। हालांकि, माया की बीमारी जन्मजात होने के कारण उसके पूरी तरह ठीक होने की समयसीमा को लेकर अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
परिचित देखभालकर्ता भी रहेंगे साथ
माया के लिए स्थानांतरण केवल एक सामान्य हवाई यात्रा नहीं थी, बल्कि उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेष चिकित्सा अभियान के रूप में इसे पूरा किया गया। यात्रा के दौरान पशु चिकित्सकों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों को भी साथ रखा गया, ताकि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।केरल वन विभाग की ओर से सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनॉय सी. बाबू और माया की देखभाल से जुड़े परिचित कर्मचारी को भी उसके साथ भेजा गया। इससे उसे नए स्थान पर भी पहले से परिचित लोगों का साथ मिल सकेगा।वंतारा की चिकित्सा टीम, पैरा-वेट्स और विशेषज्ञ पशु चिकित्सक भी इस अभियान का हिस्सा रहे। मेडिकल रिकॉर्ड, जरूरी दवाएं और आपातकालीन उपकरण साथ रखे गए थे। केरल वन विभाग ने माया के उपचार की प्रगति पर नजर रखने के लिए निगरानी समिति भी गठित की है, जो नियमित रूप से उसकी स्थिति की समीक्षा करेगी।
CIAL ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
माया को एयरलिफ्ट करने के अभियान में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) की भूमिका महत्वपूर्ण रही। एयरपोर्ट प्रशासन ने घरेलू कार्गो टर्मिनल पर विशेष व्यवस्था की, ताकि माया को पिंजरे सहित बिना किसी बाधा के चार्टर्ड विमान तक पहुंचाया जा सके।CIAL के एयरपोर्ट डायरेक्टर मनु जी और कार्गो हेड सतीश जे. पई ने टर्मिनल पर की गई व्यवस्थाओं की निगरानी की। वन विभाग, वंतारा के प्रतिनिधियों और पशु चिकित्सा टीम के सदस्यों ने भी आपसी समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाया।इस दौरान एयरपोर्ट ने परिवहन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं, लॉजिस्टिक सहयोग और परिचालन सहायता उपलब्ध कराई। उड़ान से पहले और यात्रा के दौरान माया की पशु चिकित्सकीय जांच भी की गई, ताकि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।
स्वस्थ होने पर केरल वापस लाई जाएगी माया
केरल वन विभाग ने उम्मीद जताई है कि वंतारा में विशेषज्ञ उपचार मिलने से माया की स्थिति में सुधार होगा। अधिकारियों के अनुसार, उपचार पूरा होने और स्वास्थ्य में पर्याप्त सुधार आने के बाद उसे वापस केरल लाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग और वंतारा के बीच समन्वय बनाए रखा जाएगा।माया का मामला वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराज्यीय सहयोग का उदाहरण बनकर सामने आया है। एक तरफ केरल वन विभाग ने उसकी देखभाल और उपचार के लिए लगातार प्रयास किए, वहीं वंतारा ने उसे उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली। CIAL ने भी सुरक्षित हवाई परिवहन के लिए जरूरी सहयोग दिया।फिलहाल माया के पूरी तरह स्वस्थ होने की राह आसान नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ उपचार के लिए जामनगर पहुंचने के बाद उसके पास बेहतर चिकित्सा विकल्प उपलब्ध होंगे। अब सभी की निगाहें उसकी सेहत में होने वाले सुधार पर टिकी हैं।
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