
तिरुवनंतपुरम : केरल में लंबे समय से अटकी एक महत्वपूर्ण रेलवे परियोजना की लागत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। करीब तीन दशक पहले जिस परियोजना को पूरा करने का अनुमान 550 करोड़ रुपये लगाया गया था, अब उसकी अनुमानित लागत बढ़कर 3,810 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रेलवे के निर्देशों के अनुसार वर्ष 2024 में संशोधित अनुमान को मंजूरी दी गई, जिसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज हुई।
जानकारी के अनुसार, परियोजना को दोबारा गति देने के लिए केरल सरकार और रेलवे के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई। तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, रेलवे के प्रभारी मंत्री वी. अब्दुरहमान और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच चर्चा के बाद जून 2025 में इस परियोजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया।
हालांकि, परियोजना के लंबे समय तक लंबित रहने के कारण इसकी लागत में कई गुना वृद्धि हो गई। निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी, समय के साथ बदले तकनीकी मानक और अन्य खर्चों के बढ़ने से संशोधित लागत में बड़ा अंतर आया है।
रेलवे परियोजनाओं में देरी का सीधा असर अक्सर उनकी कुल लागत पर पड़ता है। शुरुआती अनुमान के समय जो काम कम खर्च में पूरा हो सकता था, वही काम वर्षों बाद महंगाई, भूमि अधिग्रहण, श्रम लागत और निर्माण संबंधी बदलावों के कारण महंगा हो जाता है। इस परियोजना के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली है।
रेलवे के निर्देशों के मुताबिक संशोधित अनुमान तैयार किया गया, जिसमें मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर परियोजना की लागत का दोबारा आकलन किया गया। इसके बाद राज्य और केंद्र के बीच समन्वय के जरिए परियोजना को फिर से शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए।
परियोजना के समर्थकों का कहना है कि इसके पूरा होने से राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूती मिलेगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। लंबे समय से लंबित रहने के कारण इस परियोजना को लेकर लोगों में भी इंतजार बना हुआ था।
हालांकि, लागत में हुई भारी वृद्धि ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट समय पर पूरे किए जाएं तो सरकारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम पड़ता है और जनता को सुविधाओं का लाभ जल्दी मिल पाता है।
केरल सरकार और रेलवे अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके लिए आवश्यक प्रक्रियाओं, तकनीकी पहलुओं और वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
तीन दशक पहले तैयार की गई योजना का अब नए बजट के साथ आगे बढ़ना यह दिखाता है कि लंबे समय तक रुकी परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने में लागत और संसाधनों की बड़ी चुनौती सामने आती है। इसके बावजूद सरकार और रेलवे का प्रयास है कि परियोजना को पूरा कर राज्य के विकास में इसका योगदान सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल संशोधित लागत के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है। आने वाले समय में निर्माण कार्य की प्रगति और वित्तीय प्रबंधन इस बात को तय करेंगे कि यह परियोजना कितनी जल्दी अपने लक्ष्य तक पहुंच पाती है।





