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Kerala केरल: तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव और विपक्षी गतिविधियों के बीच त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मनीक साहा ने मुनगियाकामि में आयोजित एक संगठनात्मक कार्यक्रम में तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य आदिवासी समुदाय में भय खत्म करना और विकास पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार पर भरोसा करते हैं, जबकि कुछ दल केवल भय का इस्तेमाल कर अपना राजनीतिक उद्देश्य साध रहे हैं। कार्यक्रम में मनीक साहा ने कहा, “यह आदिवासी समुदाय में भय को कम करता है, और ये लोग पीएम मोदी पर भरोसा करते हैं और हमारी सरकार पर गहरा विश्वास रखते हैं। दूसरी पार्टी ने कई दिनों से केवल भय दिखाकर काम चलाया है। इसलिए किसी को उनसे डरना नहीं चाहिए, न ही किसी को डर के कारण पीछे हटना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य आदिवासी समुदाय का विकास है और इसी वजह से वह सीधे लोगों के बीच जा कर अपने कामों की रिपोर्ट दे रहे हैं। साहा ने सवाल किया कि “यह कौन सा आंदोलन है जिसमें लोग आम नागरिकों और अधिकारियों पर हमला कर रहे हैं?” और कड़ा संकेत देते हुए कहा कि ऐसे किसी भी हिंसक आंदोलन को वह स्वीकार नहीं करेंगे। “जो भी इसमें शामिल होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा,” उन्होंने स्पष्ट कहा। मुख्यमंत्री ने आगे भाजपा और केंद्र की नीतियों के तहत आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों के कारण आदिवासी समुदाय में सुरक्षा और आत्मविश्वास परवान चढ़ा है। उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता को विकास योजनाओं के लाभों के बारे में बताएँ और अफवाहों तथा डर फैलाने वालों के खिलाफ एकजुट रहें।
राज्य नेतृत्व का कहना है कि त्रिपुरा में सामाजिक समावेशन और सुरक्षा भावना बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं — इनमें सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार शामिल है। साहा ने कहा कि विकास का लक्ष्य तभी हासिल होगा जब अधिकारी और जनता मिलकर कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी तरह की हिंसा या डेराने-धमकाने की राजनीति को नकार दें। विशेषज्ञों का मानना है कि मुनगियाकामि जैसे संगठनात्मक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री का यह सख्त रुख स्थानीय स्तर पर शासन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संकेत देता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, साहा का संदेश स्पष्ट रूप से विपक्षी तत्वों को चित करने और समर्थकों में एकता बनाए रखने का प्रयास है।
हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि योजनाओं की प्रभावशीलता और तथाकथित डर वाले आरोपों पर भी स्वतंत्र जाँच और मध्यस्थता की आवश्यकता है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि विकास योजनाओं की पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी बढ़ाने से संभावित अशांति के कारणों को दूर किया जा सकता है। इस बीच मुख्यमंत्री ने पुनः आश्वस्त किया कि सरकार आदिवासी कल्याण को प्राथमिकता दे रही है और हिंसा फैलाने वालों के प्रति सख्त रवैया अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग आम जनता और अधिकारियों पर हमले कर रहे हैं, उनकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि राज्य में शांति और विकास की प्रक्रिया बाधित न हो।
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