केरल

कांचियार पंचायत में मलेरिया का प्रकोप, 14 मरीजों की पुष्टि दो की मौत

Kavita2
8 Aug 2026 4:50 PM IST
कांचियार पंचायत में मलेरिया का प्रकोप, 14 मरीजों की पुष्टि दो की मौत
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कांचियार। कांचियार पंचायत क्षेत्र में मलेरिया के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। पंचायत क्षेत्र में दूसरे राज्यों से आए तीन हजार से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें अब तक 14 लोगों में मलेरिया की पुष्टि होने की बात सामने आई है, जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पांच लोगों में डेंगू और चार लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि की जानकारी भी सामने आई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच बीमारी की रोकथाम को लेकर स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।

वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) ने आरोप लगाया है कि पंचायत प्रशासन की ओर से बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी और पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वामपंथी नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

तीन हजार से अधिक प्रवासी मजदूर

कांचियार पंचायत क्षेत्र में दूसरे राज्यों से आए तीन हजार से अधिक मजदूर विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं। बड़ी संख्या में मजदूरों के एक साथ रहने और काम करने के कारण स्वास्थ्य विभाग के सामने संक्रमण की निगरानी और रोकथाम की चुनौती बढ़ गई है।

मलेरिया मच्छर के जरिए फैलने वाली बीमारी है और इसके मामलों में समय पर पहचान तथा उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। क्षेत्र में मलेरिया के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।

स्थानीय स्तर पर मजदूरों के रहने वाले स्थानों की स्वच्छता, पानी जमा होने वाले स्थानों की सफाई और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना बीमारी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पंचायत क्षेत्र में लगातार निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

14 लोगों में मलेरिया की पुष्टि

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांचियार पंचायत क्षेत्र में अब तक 14 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। इसके अलावा पांच लोगों के डेंगू से संक्रमित होने की बात कही गई है। दो लोगों की मौत होने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता और बढ़ गई है।

हालांकि, इन मौतों का चिकित्सकीय कारण और प्रत्येक मामले की विस्तृत स्थिति संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी। बीमारी के मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग के लिए संक्रमित लोगों की पहचान, उपचार और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

मलेरिया और डेंगू दोनों ही मच्छर जनित बीमारियां हैं। बारिश के मौसम में जलजमाव और मच्छरों की बढ़ती संख्या के कारण इनका खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और साफ-सफाई जैसे उपायों की जरूरत होती है।

एचआईवी के चार मामलों की भी जानकारी

क्षेत्र में चार लोगों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, एचआईवी मलेरिया या डेंगू की तरह मच्छरों के जरिए फैलने वाली बीमारी नहीं है। इसलिए इसके मामलों को मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से अलग स्वास्थ्य विषय के रूप में देखना जरूरी है।

एचआईवी से जुड़े मामलों में मरीजों की निजता और गरिमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। संक्रमित लोगों को उचित चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकता होनी चाहिए।

LDF ने पंचायत प्रशासन पर साधा निशाना

मामले को लेकर LDF नेताओं ने पंचायत प्रशासनिक समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बीमारी फैलने की जानकारी सामने आने के बावजूद रोकथाम के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

वामपंथी नेताओं का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर केवल बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन जमीन पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान चलाया जाता तो बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी।

LDF ने प्रभावित इलाकों में तत्काल स्वास्थ्य जांच बढ़ाने, मरीजों की पहचान करने और मच्छर नियंत्रण अभियान तेज करने की मांग की है।

स्वास्थ्य निगरानी बढ़ाने की जरूरत

बड़ी संख्या में मजदूरों की मौजूदगी को देखते हुए क्षेत्र में स्वास्थ्य निगरानी बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है। मजदूरों के रहने वाले स्थानों पर नियमित स्वास्थ्य जांच, बुखार से पीड़ित लोगों की तत्काल जांच और संदिग्ध मामलों की निगरानी से बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही साफ पानी की उपलब्धता, कचरा प्रबंधन और जलजमाव वाले स्थानों की सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना मलेरिया और डेंगू की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है।

मजदूरों में जागरूकता अभियान जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी की रोकथाम के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। मजदूरों और स्थानीय लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाना जरूरी है। बुखार, ठंड लगना, शरीर में दर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की सलाह दी जानी चाहिए।

मलेरिया की पुष्टि होने वाले मरीजों का समय पर उपचार शुरू करना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवा का पूरा कोर्स करना भी जरूरी है। इसी तरह डेंगू के संदिग्ध मरीजों की निगरानी और आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है।

प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

कांचियार पंचायत में बीमारी के बढ़ते मामलों के बीच अब लोगों की नजर पंचायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर है। दो मौतों और मलेरिया, डेंगू तथा एचआईवी के मामलों की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

LDF ने जहां प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है, वहीं क्षेत्र में प्रभावी स्वास्थ्य उपायों की मांग तेज हो गई है। आने वाले दिनों में बीमारी के नए मामलों की पहचान, स्वास्थ्य जांच और रोकथाम अभियान की स्थिति से ही स्पष्ट होगा कि प्रशासन इस चुनौती से निपटने में कितना प्रभावी कदम उठा पाता है।

फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी मजबूत करने, मच्छर नियंत्रण और स्वच्छता अभियान तेज करने तथा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की है, ताकि बीमारी का प्रसार और आगे न बढ़े।

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