केरल
KIIFB पर बड़ा खुलासा: केरल पर छोड़ा ₹70,415 करोड़ का भारी कर्ज
Tara Tandi
16 Oct 2026 10:29 AM IST

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तिरुवनंतपुरम: एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में लोन चुकाने और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) पर 70,415.54 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। लोन चुकाने का सिलसिला 2041-42 तक चलेगा। इस अनुमान में जमीन अधिग्रहण की लागत शामिल नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों में KIIFB के कामकाज ने सरकारी विभागों की प्रशासनिक प्रणालियों और उनकी कार्यक्षमता को कमजोर कर दिया है।
लोन पर ऊंची ब्याज दरों के कारण हर साल 396 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ। 'मसाला बॉन्ड' की वजह से भी 181.73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया। 2022 से, KIIFB द्वारा लिए गए लोन को राज्य की कुल लोन लेने की सीमा (borrowing limit) में शामिल कर लिया गया है। इसलिए, वित्त विभाग ने तय किया था कि सरकार को इन लोन के लिए गारंटी देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, 6 जून 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में, इस फैसले को पलट दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त विभाग के फैसले को पलटने का अधिकार केवल कैबिनेट के पास है। रिपोर्ट में नियमों के गंभीर उल्लंघन की भी पहचान की गई है, जिसमें KIIFB के पूर्व CEO का 'एक्स-ऑफिसियो सेक्रेटरी' (पदेन सचिव) के रूप में काम करना, सलाहकारों को किए गए भुगतान में पारदर्शिता की कमी और जमीन अधिग्रहण में अनियमितताएं शामिल हैं।
ऊंची ब्याज दरों पर लिए गए फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ: रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि ऊंची ब्याज दरों पर लिए गए फंड को महीनों तक बिना इस्तेमाल के रखा गया। जहां लोक निर्माण विभाग (PWD) को कुल फंड का 52.6 प्रतिशत हिस्सा मिला, वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की परियोजनाओं के लिए केवल 0.18 प्रतिशत फंड ही आवंटित किया गया। अन्य प्रमुख निष्कर्षों में ये बातें शामिल हैं:
KIIFB ने मूल रूप से मंजूर किए गए 40 पदों के मुकाबले 498 लोगों की नियुक्ति की।
केंद्र सरकार ने KIIFB के लोन की वजह से केरल की लोन लेने की सीमा में 25,932.55 करोड़ रुपये की कटौती कर दी।
परियोजनाओं को लागू करने में 13,103 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आया। रिपोर्ट में KIIFB के लगभग 5,821 करोड़ रुपये के निवेश पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि इस पर सरकार की सॉवरेन गारंटी (सरकारी गारंटी) भी मौजूद है।
मुख्य सिफारिशें: विशेषज्ञ समिति ने KIIFB की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने के लिए कई सिफारिशें की हैं।
KIIFB के लोन चुकाने के लिए राज्य के बजट में फंड आवंटित करें।
ज्यादा ब्याज दर वाले लोन की जगह कम ब्याज दर वाले लोन लें।
चल रही परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बजट में प्रावधान करें।
प्रोजेक्ट मूल्यांकन विभाग (प्रोजेक्ट अप्रेजल डिवीजन) को राज्य योजना बोर्ड में स्थानांतरित करें।
कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों का पुनर्गठन करें।
नियुक्तियां करने के CEO के अधिकार को खत्म करें।
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