केरल

ED का बड़ा छापा, दो राज्यों के 11 ठिकानों पर रेड

Kavita2
4 Nov 2026 11:42 AM IST
ED का बड़ा छापा, दो राज्यों के 11 ठिकानों पर रेड
x

कोच्चि। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को केरल और तमिलनाडु में बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक बहुराज्यीय सहकारी समिति और उसके प्रमोटर के खिलाफ चल रही धनशोधन जांच के सिलसिले में की गई है। ईडी की कोच्चि इकाई ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दोनों राज्यों में संबंधित परिसरों की तलाशी ली।

जांच के केंद्र में भारत लजना मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (बीएलएम) के संस्थापक सदस्य और वास्तविक रूप से अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक की भूमिका निभाने वाले आर. प्रेमकुमार हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि सहकारी समिति में आम लोगों द्वारा जमा कराई गई करोड़ों रुपये की राशि का कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, ईडी ने बुधवार को केरल और तमिलनाडु में कुल 11 परिसरों को तलाशी अभियान के दायरे में लिया। इस कार्रवाई का उद्देश्य सहकारी समिति के वित्तीय लेनदेन, जमा राशि के उपयोग और कथित रूप से अन्य खातों में भेजे गए धन से संबंधित साक्ष्यों की जांच करना है।

जांच एजेंसी का आरोप है कि आर. प्रेमकुमार ने समिति में अपने प्रभाव और नियंत्रण का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोपों के अनुसार, सार्वजनिक जमाकर्ताओं से एकत्र की गई रकम में से करोड़ों रुपये उनकी पत्नी तथा अन्य रिश्तेदारों के बैंक खातों में भेजे गए। ईडी को संदेह है कि इस धन का उपयोग व्यक्तिगत जरूरतों और संपत्ति संबंधी लेनदेन में किया गया।

मामले में एक महत्वपूर्ण आरोप समिति की संपत्ति से भी जुड़ा है। ईडी के अनुसार, सहकारी समिति के स्वामित्व वाले रागम थिएटर को कथित तौर पर गिरवी रखा गया, लेकिन इससे संबंधित धन समिति के खातों में नहीं पहुंचा। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संपत्ति के बदले प्राप्त वित्तीय लाभ का वास्तविक उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया।

इसके अतिरिक्त तमिलनाडु के कांचीपुरम में लगभग 500 एकड़ भूमि खरीदे जाने से संबंधित आरोप भी सामने आए हैं। ईडी का दावा है कि यह जमीन प्रेमकुमार की पत्नी के नाम पर खरीदी गई। जांच के दौरान इस संपत्ति की खरीद के लिए इस्तेमाल धन के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सहकारी समितियां आमतौर पर अपने सदस्यों और जमाकर्ताओं के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर संचालित की जाती हैं। इनमें जमा होने वाली रकम का उपयोग निर्धारित नियमों और संस्थागत उद्देश्यों के अनुसार किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि सार्वजनिक जमाकर्ताओं की धनराशि का कथित तौर पर निजी खातों में स्थानांतरण हुआ है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय बन सकता है।

इस मामले की जांच का एक प्रमुख पहलू यह है कि जमाकर्ताओं से प्राप्त राशि किन-किन बैंक खातों में पहुंची और बाद में उसका उपयोग कैसे किया गया। वित्तीय जांच में बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति खरीद से संबंधित दस्तावेज, खातों के बीच धन हस्तांतरण और अन्य रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ईडी की कार्रवाई के दौरान इन संभावित वित्तीय संबंधों की जांच की जा रही है। हालांकि, बुधवार की तलाशी में कितनी नकदी, दस्तावेज या डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

भारत लजना मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी से संबंधित वित्तीय गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। केरल सरकार के वर्ष 2023 के एक आधिकारिक आदेश में इस संस्था की विभिन्न शाखाओं के माध्यम से सार्वजनिक जमा स्वीकार किए जाने और निवेशकों के हितों से संबंधित शिकायतों का उल्लेख किया गया था।

उस समय राज्य की अपराध शाखा द्वारा प्रारंभिक जांच की गई थी। सरकारी दस्तावेज के अनुसार, संस्था की गतिविधियों और आम लोगों से जमा स्वीकार करने की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जांच की आवश्यकता महसूस की गई थी। संबंधित शाखाओं के विरुद्ध मामले दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए थे।

अब ईडी की ताजा कार्रवाई से इस मामले में धनशोधन के पहलुओं की जांच आगे बढ़ी है। केंद्रीय जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं से प्राप्त धन का उपयोग किन संपत्तियों और खातों में किया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच एजेंसियां यह देखती हैं कि किसी कथित आपराधिक गतिविधि से प्राप्त राशि को किस तरह स्थानांतरित किया गया और क्या उसे वैध आय या संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास हुआ। इस प्रक्रिया में कई बैंक खातों, संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के बीच होने वाले लेनदेन की जांच की जा सकती है।

प्रेमकुमार के विरुद्ध लगे आरोपों के संदर्भ में उनकी पत्नी और रिश्तेदारों के खातों का उल्लेख महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के बैंक खाते में रकम पहुंचना अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता। जांच में धन के स्रोत, हस्तांतरण का उद्देश्य और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के बारे में ठोस साक्ष्य आवश्यक होते हैं।

इसी प्रकार कांचीपुरम में कथित रूप से खरीदी गई लगभग 500 एकड़ भूमि के मामले में भी संपत्ति के दस्तावेज और भुगतान का स्रोत जांच के महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं। यह स्पष्ट होना आवश्यक होगा कि भूमि खरीद में इस्तेमाल धन का सहकारी समिति की राशि से कोई संबंध था या नहीं।

ईडी की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सहकारी संस्थाओं में जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन संस्थाओं में आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए जमा राशि का सुरक्षित प्रबंधन और खातों का उचित लेखा-परीक्षण आवश्यक है।

फिलहाल केरल और तमिलनाडु के 11 ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद जांच से संबंधित विस्तृत निष्कर्ष सामने आने का इंतजार है। ईडी के आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी। जांच एजेंसी ने आर. प्रेमकुमार और अन्य संबंधित व्यक्तियों के कथित वित्तीय लेनदेन को जांच के दायरे में रखा है।

इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमाकर्ताओं की रकम के कथित हस्तांतरण, रागम थिएटर को गिरवी रखने और कांचीपुरम की भूमि खरीद के बीच किस प्रकार का वित्तीय संबंध था। फिलहाल ईडी की छापेमारी ने सहकारी समिति के वित्तीय कामकाज और जमाकर्ताओं की रकम की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

Next Story