केरल
कोच्चि हादसे में बड़ा विवाद, प्रभावशाली लोगों को बचाने के आरोपों से मचा हड़कंप
Ratna Netam
31 Oct 2026 5:45 PM IST

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कोच्चि। केरल के कोच्चि में तेज रफ्तार लग्जरी कार की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस हादसे के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, आरोपी के प्रभावशाली पारिवारिक संबंधों और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। केरल के विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पैसे और प्रभाव के दम पर किसी को कानून से बचने की छूट नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मृतक के परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित परिवार से 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मुलाकात की थी, जबकि पिनराई विजयन ने विपक्ष के नेता के रूप में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। हादसे में मरने वाले व्यक्ति की उम्र 55 वर्ष थी और कथित रूप से कार चला रहा आरोपी 17 वर्षीय किशोर है।
तेज रफ्तार मर्सिडीज की टक्कर से गई जान
यह घटना 25 अक्टूबर को कोच्चि के चेरानल्लूर इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, 55 वर्षीय जयबालकृष्णन अपनी सड़क किनारे स्थित खाने की दुकान बंद करने के बाद स्कूटर से घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी।हादसे में जयबालकृष्णन गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि कार कथित तौर पर एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था। वाहन न्यायिक अधिकारी के नाम पर पंजीकृत बताया गया है।घटना के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी के पिता के न्यायिक पद पर होने के कारण मामले में शुरुआत से नरमी बरती गई।
पिनराई विजयन ने पुलिस पर उठाए सवाल
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस आधार पर प्रभावशाली परिवारों से जुड़े आरोपियों को विशेष व्यवहार दिया जा रहा है।विजयन ने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए। किसी व्यक्ति के पास धन, पद या प्रभाव होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे कानूनी जवाबदेही से बचाया जा सकता है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआती प्राथमिकी और साक्ष्यों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनके अनुसार, यदि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच प्रभावित होती है तो इससे न्याय व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास कमजोर होगा।विजयन ने पीड़ित परिवार की न्याय की लड़ाई का समर्थन करने की बात भी कही। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की जांच जारी है।
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन पहुंचे पीड़ित परिवार के घर
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने जयबालकृष्णन के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उनके साथ एर्नाकुलम के सांसद हिबी ईडन और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।मुख्यमंत्री ने मृतक की पत्नी बिंदु और बेटी भद्रा कीर्ति से बातचीत की तथा परिवार को सरकार के सहयोग का भरोसा दिया।मुलाकात के दौरान परिवार ने मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत सौंपी। इसमें जांच प्रभावित किए जाने की आशंका जताई गई और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में किसी भी व्यक्ति के प्रभाव को न्याय के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर गंभीर सवाल
हादसे के बाद पुलिस ने शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने और मौत का कारण बनने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। किशोर को पुलिस थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया गया था।इसके बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध के बीच पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 भी जोड़ी, जो हत्या की श्रेणी में न आने वाले गैर-इरादतन मानव वध से संबंधित है।किशोर को दोबारा हिरासत में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया, जहां से उसे फिर जमानत मिल गई।परिवार ने इस फैसले पर असंतोष जताते हुए जमानत रद्द करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
चार पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
मामले में पुलिस की कथित लापरवाही सामने आने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इनमें थाने के अधिकारी और अन्य पुलिस कर्मचारी शामिल हैं।आरोप है कि शुरुआती जांच में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस थाने में मौजूद कुछ लोगों के मोबाइल फोन से तस्वीरें हटवाई गईं।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पी. विजयन ने मामले की समीक्षा की और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की। उन्होंने कहा कि कानून के सामने किसी व्यक्ति को उसके पद या पारिवारिक पहचान के आधार पर अलग व्यवहार नहीं मिलना चाहिए।जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या साक्ष्यों को प्रभावित करने या आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश हुई थी।
न्यायाधीश की भूमिका भी जांच के दायरे में
कार के पंजीकृत मालिक और आरोपी किशोर के पिता की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में लाई गई है। पुलिस ने न्यायिक अधिकारी को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए के तहत आरोपी बनाया है।इस प्रावधान के तहत नाबालिग द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने पर कुछ परिस्थितियों में अभिभावक या वाहन मालिक की जवाबदेही तय की जा सकती है।रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने न्यायिक अधिकारी की गिरफ्तारी के लिए आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया भी शुरू की है। हालांकि, आरोप दर्ज होने का अर्थ अपराध सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग दोहराई
जयबालकृष्णन की बेटी भद्रा कीर्ति ने कहा है कि परिवार अपने पिता की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच चाहता है। परिवार को आशंका है कि आरोपी के प्रभावशाली संबंधों के कारण मामले की दिशा प्रभावित हो सकती है।इस घटना ने एक बार फिर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, तेज रफ्तार ड्राइविंग और सड़क दुर्घटनाओं में कानूनी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर बहस तेज कर दी है।फिलहाल पीड़ित परिवार की नजर अदालत की आगामी कार्रवाई और पुलिस जांच पर टिकी है। मुख्यमंत्री की ओर से कार्रवाई का आश्वासन और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच यह मामला केरल में कानून के समान अनुपालन की महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है।
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