
अथिराप्पिल्ली। केरल के अथिराप्पिल्ली क्षेत्र के वेट्टिकुझी इलाके में पकड़े गए तेंदुए को वन विभाग ने उपचार के बाद परमबिकुलम टाइगर सैंक्चुअरी के जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया है। यह तेंदुआ पिछले कुछ समय से स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम ने इसे पिंजरे में कैद किया था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पकड़े जाने के बाद तेंदुए की स्थिति की जांच की गई और उसे तत्काल आवश्यक उपचार दिया गया। स्वास्थ्य जांच और प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुरक्षित तरीके से परमबिकुलम टाइगर सैंक्चुअरी क्षेत्र में ले जाकर छोड़ा गया।
स्थानीय लोगों में बनी हुई थी दहशत
अथिराप्पिल्ली के वेट्टिकुझी क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी से स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, तेंदुए की गतिविधियों के कारण आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा था।
वन विभाग को लगातार तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद अधिकारियों ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया।
मंगलवार सुबह पकड़ा गया तेंदुआ
वन विभाग की कार्रवाई के दौरान मंगलवार सुबह वेट्टिकुझी इलाके में तेंदुआ पिंजरे में फंस गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला।
अधिकारियों ने बताया कि जंगली जानवर को पकड़ने के बाद सबसे पहले उसकी स्थिति का आकलन किया गया। किसी भी तरह की चोट या स्वास्थ्य समस्या को देखते हुए उसे जरूरी इलाज दिया गया।
परमबिकुलम में छोड़ा गया
उपचार के बाद वन विभाग ने तेंदुए को उसके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण वाले परमबिकुलम टाइगर सैंक्चुअरी क्षेत्र में छोड़ने का फैसला किया। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों को पकड़ने के बाद उन्हें सुरक्षित और उपयुक्त जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाता है, ताकि वे अपने प्राकृतिक जीवन चक्र को जारी रख सकें।
तेंदुए को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया वन विभाग की निगरानी में पूरी की गई।
बाघ की तलाश के लिए पहले से चल रहा था अभियान
इस बीच, चलाकुडी वन डिवीजन के अंतर्गत एक अलग-थलग इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर भी वन विभाग सक्रिय है। करीब एक महीने पहले बाघ को पकड़ने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया था।
यह टीम चक्कलक्कल रॉय नाम के व्यक्ति के घर के पास तैनात की गई थी। बताया जा रहा है कि रॉय बाघ के हमले में घायल हुए थे, जिसके बाद इलाके में बाघ की तलाश तेज कर दी गई थी।
इलाके में और बाघ होने की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में केवल एक वन्यजीव की मौजूदगी नहीं हो सकती, बल्कि और भी बाघ या तेंदुए हो सकते हैं। इस आशंका के चलते ग्रामीणों ने वन विभाग से लगातार निगरानी बनाए रखने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन सकती है। ऐसे में समय रहते सुरक्षा कदम उठाना जरूरी है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण दोनों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जा रहे हैं।
लोगों से अपील की गई है कि वे जंगल क्षेत्रों के करीब जाने से बचें और किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती
केरल के कई वन क्षेत्रों में समय-समय पर वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बढ़ते मानव विस्तार और जंगलों के आसपास बढ़ती गतिविधियों के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बन रहा है।
वन विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में वन्यजीवों को सुरक्षित पकड़कर उपयुक्त स्थानों पर छोड़ना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
फिलहाल अथिराप्पिल्ली क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी जारी है। तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर छोड़े जाने के बाद भी अधिकारियों ने सतर्कता बरतने और क्षेत्र में नियमित गश्त जारी रखने की बात कही है।





