
Kerala केरल: केरल विधानसभा चुनाव में UDF की लहर के बीच कोल्लम जिले की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला, लेकिन इसी माहौल में पुनालुर सीट पर लेफ्ट फ्रंट (LDF) ने अपनी पकड़ बनाए रखी। यह सीट LDF के लिए राहत की एकमात्र किरण साबित हुई, जबकि जिले की बाकी सभी नौ सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा।
पुनालुर सीट पर CPI उम्मीदवार सी. अजयप्रसाद ने 21,529 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ यह सीट लगातार सातवीं बार LDF के खाते में गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र अभी भी लेफ्ट का मजबूत गढ़ बना हुआ है।
पुनालुर एक बॉर्डर और पहाड़ी इलाका है, जहां लेफ्ट पार्टियों का पारंपरिक आधार काफी मजबूत माना जाता है। इस बार चुनावी मुकाबले में एंटी-इनकंबेंसी का असर देखा गया, लेकिन अजयप्रसाद ने जमीनी स्तर पर संगठनात्मक काम और लगातार संपर्क अभियान के जरिए अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी।
चुनाव प्रचार के दौरान जहां UDF खेमे में सीटों को लेकर अंदरूनी विवाद और उम्मीदवार चयन से जुड़ी उलझनें चर्चा में रहीं, वहीं LDF ने अपने इस पारंपरिक क्षेत्र में संतुलित रणनीति अपनाई। इसका असर परिणामों में भी साफ दिखाई दिया।
हालांकि पिछले चुनाव की तुलना में LDF की बढ़त में कमी आई है। पिछली बार इस सीट पर 37,075 वोटों का बड़ा अंतर था, जो इस बार घटकर 21,529 रह गया। इसके बावजूद LDF के लिए इस सीट को बचाए रखना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोल्लम जिले की अन्य सीटों पर जहां LDF को हार का सामना करना पड़ा, वहीं पुनालुर ने पार्टी को कुछ हद तक राहत दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट अब भी लेफ्ट की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और स्थानीय प्रभाव को दर्शाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में इस क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी हो सकती है, क्योंकि UDF और अन्य दल यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, पुनालुर सीट ने यह साबित किया है कि बदलते राजनीतिक माहौल के बावजूद कुछ क्षेत्र अभी भी पारंपरिक राजनीतिक ताकतों के प्रभाव में बने हुए हैं।





