
Kerala केरल: कुट्टनाड क्षेत्र में धान की खरीद प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनके भुगतान का बड़ा हिस्सा अब तक नहीं मिल पाया है। जानकारी के अनुसार, धान की कीमत के तौर पर किसानों को लगभग 185 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
धान की बड़ी मात्रा में खरीद होने के बावजूद भुगतान में देरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूसरी फसल की तैयारी और लगातार खेती से जुड़े खर्चों के कारण किसानों पर आर्थिक बोझ और गहरा होता जा रहा है। कई किसान इस स्थिति को रोजी-रोटी के संकट के रूप में देख रहे हैं।
इस समय खेतों में दूसरी फसल के लिए तैयारियां चल रही हैं। खेतों की खुदाई और जुताई का काम जारी है, लेकिन पानी के अत्यधिक उपयोग के कारण कुछ जगहों पर मौजूदा फसलों को भी नुकसान पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि मई महीने के अंत तक खेतों को बुवाई के लिए तैयार करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता है। समय पर धान का भुगतान न मिलने के कारण उनके पास निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं।
इसके अलावा, नए अकादमिक वर्ष की शुरुआत ने भी किसानों के खर्चों में बढ़ोतरी कर दी है। बच्चों की स्कूल फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था करना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है।
कई किसानों का कहना है कि खेती के खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना अब चुनौती बन गया है। समय पर भुगतान न मिलने से उन्हें कर्ज लेने या अन्य स्रोतों पर निर्भर रहने की स्थिति बन रही है।
स्थानीय किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि लंबित 185 करोड़ रुपये का भुगतान जल्द से जल्द जारी किया जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके और आगामी खेती के कार्य प्रभावित न हों।
कुल मिलाकर, कुट्टनाड में धान खरीद भले ही अंतिम चरण में पहुंच गई हो, लेकिन लंबित भुगतान ने किसानों की आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे उनकी खेती और पारिवारिक जीवन दोनों पर दबाव बढ़ गया है।





