
वायनाड: वायनाड पास पर शनिवार रात एक KSRTC की मल्टी-एक्सल स्कैनिया बस के फंस जाने से करीब चार घंटे तक यातायात बाधित रहा। बेंगलुरु जा रही यह बस पास के नौवें मोड़ पर फंस गई, जिसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, KSRTC की स्कैनिया बस शनिवार रात करीब 9:30 बजे वायनाड पास के नौवें मोड़ पर पहुंची थी। इसी दौरान बस का पिछला हिस्सा सड़क पर फंस गया। चालक ने बस को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन वाहन आगे नहीं बढ़ सका। वहीं, पीछे करने की कोशिश करने पर भी बस को हटाना संभव नहीं हुआ।
बस के बीच सड़क पर फंस जाने के कारण पास पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। बड़े वाहनों के लिए रास्ता बंद हो गया, जबकि केवल छोटी गाड़ियां ही किसी तरह एक तरफ से निकल पा रही थीं। इसके चलते दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
घटना के बाद मौके पर मौजूद यात्रियों और वाहन चालकों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। हालांकि, बस का आकार और सड़क की संकरी स्थिति के कारण उसे हटाना आसान नहीं था। कई घंटों तक यातायात सामान्य नहीं हो सका।
ट्रैफिक जाम के कारण वायनाड पास से गुजरने वाले सैकड़ों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई लोग घंटों तक अपने वाहनों में फंसे रहे। लंबी दूरी की यात्रा कर रहे यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वायनाड पास के कई मोड़ बेहद संकरे और घुमावदार हैं। भारी और बड़े वाहनों को इन रास्तों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे स्थानों पर वाहन फंसने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
KSRTC की मल्टी-एक्सल स्कैनिया जैसी लंबी बसों को पहाड़ी और संकरे रास्तों पर चलाने में विशेष सावधानी की जरूरत होती है। नौवें मोड़ जैसे स्थानों पर थोड़ी सी चूक भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने बस को हटाने की कोशिश की। काफी प्रयासों के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका।
यात्रियों का कहना है कि ऐसे व्यस्त मार्गों पर आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। उनका सुझाव है कि पहाड़ी मार्गों पर बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त निगरानी और सहायता दल उपलब्ध रहने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं में लंबे समय तक जाम की स्थिति न बने।
वहीं, परिवहन अधिकारियों का कहना है कि घटना के कारणों की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि बस किस वजह से मोड़ पर फंसी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
वायनाड पास राज्य के महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों में से एक है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में किसी बड़े वाहन के फंसने से पूरे मार्ग की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
शनिवार रात हुई इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों पर भारी वाहनों के संचालन और आपात प्रबंधन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की मांग है कि ऐसे संवेदनशील हिस्सों पर सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को और मजबूत किया जाए।





