
Kerala केरल: तिरुवंबडी में करीब 36 साल पहले हुई एक बस लूट की वारदात के आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने रविवार को बताया कि 71 वर्षीय आरोपी को कर्नाटक के मैसूर से पकड़ा गया है। आरोप है कि आरोपी ने बंदूक की नोक पर केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस के टिकट कलेक्शन को लूटा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मलप्पुरम जिले के अरीकोड निवासी वीके जोस के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से अपनी असली पहचान छिपाकर कर्नाटक के मैसूर में रह रहा था।
फर्जी नाम से रह रहा था आरोपी
पुलिस ने बताया कि वीके जोस मैसूर के नरसिम्हराजा इलाके में शिवकुमार नाम की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इतने लंबे समय तक वह पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा।
पुलिस को हाल ही में आरोपी के ठिकाने के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई। जानकारी की पुष्टि होने के बाद तिरुवंबडी पुलिस ने कर्नाटक पहुंचकर कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
1990 में हुई थी बस लूट की घटना
पुलिस के मुताबिक, यह मामला वर्ष 1990 का है। आरोप है कि वीके जोस ने तिरुवंबडी और कोम्बारा के बीच चलने वाली KSRTC बस को निशाना बनाया था।
उस समय आरोपी ने कथित तौर पर बस के कंडक्टर पर बंदूक तान दी थी और टिकट बिक्री से जमा की गई रकम लूट ली थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था।
वारदात के बाद तिरुवंबडी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ डकैती का मामला दर्ज किया था और उसकी तलाश शुरू की थी।
अदालत ने जारी किया था गिरफ्तारी वारंट
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी का पता लगाने की कोशिश की गई, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। लंबे समय तक फरार रहने के बाद अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था।
इसके बावजूद आरोपी कई वर्षों तक अपनी पहचान बदलकर छिपा रहा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान उसने कहां-कहां निवास किया और क्या उसकी किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भी भूमिका रही है।
36 साल बाद मिली सफलता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने मामले में आरोपी की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा सके।
पहचान छिपाकर बचता रहा कार्रवाई से
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर पुलिस को चकमा दिया। फर्जी नाम और पहचान के सहारे वह कई वर्षों तक सामान्य जीवन जीता रहा।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने फर्जी दस्तावेज कैसे हासिल किए और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की थी।
पुराने मामलों पर पुलिस की नजर
इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर से पुराने लंबित मामलों को सुलझाने के प्रयासों पर भी ध्यान गया है। कई बार आरोपी वर्षों तक फरार रहने के बाद अलग-अलग स्थानों पर पहचान बदलकर रह रहे होते हैं।
पुलिस तकनीक, खुफिया जानकारी और स्थानीय नेटवर्क की मदद से ऐसे आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती है।
आगे की कानूनी कार्रवाई जारी
फिलहाल आरोपी वीके जोस को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस जल्द ही उसे अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। 36 साल पुराने इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी से पीड़ित पक्ष और जांच अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, जांच एजेंसियां लगातार प्रयास के जरिए आरोपियों तक पहुंच सकती हैं। पुलिस अब आरोपी के फरार रहने के दौरान की गतिविधियों और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।





